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सोमवार, 4 नवंबर 2013

“भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर…” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

भइया दूज के पावन अवसर पर 
अपना एक पुराना गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ!

मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर,
 कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।
लग जाये किसी की न तुमको नजर,
दूज के इस तिलक में यही भावना।।
चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,
उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,
कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,

सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
 हों सफल भाइयों की सभी साधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।। 
रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
    नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
    आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
    दूज के इस तिलक में यही भावना।।
    बहुत सुंदर भाव.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर रचना | भाई दूज की शुभकामनायें |

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या बात है शास्त्री जी,
    कितनी सुन्दर भावना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. शुभ भाव से प्रेरित सुन्दर सरल मांगलिक रचना उत्सव सप्ताह की वेला में।

    थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,
    सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
    हों सफल भाइयों की सभी साधना।
    दूज के इस तिलक में यही भावना।।

    मयंक कौना का एक कौना हमें बनाने के लिए शुक्रिया आदरणीय शास्त्री जी का।

    उत्तर देंहटाएं
  5. रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
    नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
    आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
    दूज के इस तिलक में यही भावना।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
    नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
    आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
    दूज के इस तिलक में यही भावना।।
    भावनाओं का अनुपम संयोजन ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. भाई दूज की शुभकामनायें !
    सुंदर रचना हमेशा की तरह !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत उम्दा गीत , आपको शुभकामनायें ..

    उत्तर देंहटाएं
  9. जब सब रिस्ते तार-तार हो रहे हैं .. इस बीच भाई-बहन का प्यार ज़िंदा है
    छठ पर्व की पावन बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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