"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

"दोहागीत-आम आदमी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कल तक मस्त वज़ीर थे, आज हुए हैं त्रस्त।
आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

दशकों से खाते रहे, नोच-नोचकर देश।
वीराना सा कर दिया, उपवन का परिवेश।।
छेद स्वयं के पात्र में, करने लगे दलाल।
हुए एकजुट लोग तब, दशा देख विकराल।।
मत के प्रबल प्रहार से, दुर्ग कर दिया ध्वस्त।
आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

दुर्बल को खाने लगीं, जब ये मोटी मीन।
जीने के अधिकार सब, लिए इन्होंने छीन।
लोकतन्त्र में बचा तब, मत का शेष विकल्प।
अन्तस की आवाज का, मन में था संकल्प।।
अब वो खाली हो गये, कल तक जो थे व्यस्त।
आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

जनता का जनतन्त्र है, आज हुआ आभास।
मत की ताकत पर सदा, रखना है विश्वास।।
खून-खराबे का नहीं, भारत में कुछ काम।
परिवर्तन का आम ही, करते पूरा काम।।
चाहे जिस दल का करें, उगता सूरज अस्त।
आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

निर्धन को धनवान सा, सुलभ सदा हो न्याय।
नहीं किसी के साथ हो, भेद-भाव अन्याय।।
भारत माता कर रही, कब से यही पुकार।
भ्रष्ट सियासत की नहीं, भारत को दरकार।।
संसद में पहुँचे नहीं, रिश्वत के अभ्यस्त।
आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-12-2013) "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1461 पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    उत्तर देंहटाएं
  2. जनता का जनतन्त्र है, आज हुआ आभास।
    मत की ताकत पर सदा, रखना है विश्वास।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जनता का जनतन्त्र है, आज हुआ आभास।
    मत की ताकत पर सदा, रखना है विश्वास।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. चाहे जिस दल का करें, उगता सूरज अस्त।
    आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।

    सुन्दर अभिव्यक्ति...!
    RECENT POST -: मजबूरी गाती है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. जनतंत्र ने तो छक्के छुड़ा दिए हैं..कई लोगो को धोबीपाट दे दिया है....हकीकत की जमीन इतनी सख्त हो सकती है ये देख कर कई नेताओं को अबतक होश नहीं आया है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया है गुरुवर -
    आभार आपका-

    उत्तर देंहटाएं
  7. निर्धन को धनवान सा, सुलभ सदा हो न्याय।
    नहीं किसी के साथ हो, भेद-भाव अन्याय।।
    भारत माता कर रही, कब से यही पुकार।
    भ्रष्ट सियासत की नहीं, भारत को दरकार।।
    संसद में पहुँचे नहीं, रिश्वत के अभ्यस्त।
    आम आदमी ने किये, सभी हौसले पस्त।।

    बेहतरीन सामयिक रचना आइना दिखाती सत्ता के थोक दलालों को।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails