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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

"कैसे प्यार करेगा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

आज एक बहुत पुरानी रचना
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जो बहती गंगा में अपने हाथ नही धो पाया, 
जीवनरूपी भवसागर को, कैसे पार करेगा? 
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जो मानव-चोला पाकर इन्सान नही हो पाया, 
वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?
--------
जो लेने का अभिलाषी है, देने में पामर है, 
जननी-जन्मभूमि का. वो कैसे आभार करेगा? 
वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?
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जो स्वदेश का खाता और परदेशों की गाता है, 
वो संकटमोचन बनकर, कैसे उद्धार करेगा? 
वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?
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जो खेतों और खलिहानों में, चिंगारी दिखलाता. 
प्रेम-प्रीत के घर का वो, कैसे आधार धरेगा? 
वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?
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बना मील का पत्थर जो, पथ को इंगित करता है,
वो संगी-साथी बनकर, कैसे व्यवहार करेगा?
वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार १०/१२/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया है गुरुवर-
    आभार आपका-

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर रचना.......
    सर जी. मैं अभी ब्लॉग संचालन में नयी हूँ.. आप मेरी लिखी यशोधरा में आकर कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरुर दे कर गलत सही बतायें.. आपका बहुत बहुत आभार ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बना मील का पत्थर जो, पथ को इंगित करता है,
    वो संगी-साथी बनकर, कैसे व्यवहार करेगा?
    वो कुदरत की संरचना को, कैसे प्यार करेगा?

    सुन्दर मनोहर।

    उत्तर देंहटाएं

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