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रविवार, 16 मार्च 2014

"खेलते होली मोहनलाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उड़त हैं रंग अबीर-गुलाल!
खेलते होली मोहनलाल!!

कोई गावे मस्त रागनी, कोई ढोल बजावे,
मस्ती में भर करके राधा अपना नाच दिखावे,
बजाते ग्वाले हैं खड़ताल!
खेलते होली मोहनलाल!!

भोली बालाओं को, कान्हा बहलावें-फुसलावें,
धोखे से आ करके उनके मुँह पर रंग लगावें,
गोपियों के बिगड़े हैं हाल!
खेलते होली मोहनलाल!!

देवर-भाभी में होती है, जमकर आँख-मिचौली,
गली-गाँव में घूम रहीं हैं हुलियारों की टोली,
मचा है चारों ओर धमाल!
खेलते होली मोहनलाल!!

रंग-बिरंगी पिचकारी, गोपाल-बाल के कर मे,
पकवानों की सोंधी-सोंधी गन्ध समाई घर में,
सजे गुझिया-मठरी के थाल!
खेलते होली मोहनलाल!!

जीजा-साली में होती है, मोहक हँसी-ठिठोली,
खुशियों की सौगातें लेकर आई फिर से होली.
हुए हैं रंग-बिरंगे गाल!
खेलते होली मोहनलाल!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर ।
    होली की हार्दिक शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रंग बिरंगी सुंदर प्रस्तुति...!
    सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाए ....
    RECENT पोस्ट - रंग रंगीली होली आई.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर.
    होली की मंगलकामनाएँ !

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (03-03-2014) को ''होली आई रे आई होली आई रे '' (चर्चा मंच-1554) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर होली गीत... आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें ..

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर
    होली की हार्दिक शुभकामनाऐं ।
    new post: ... कि आज होली है !

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह...सामयिक और सुन्दर पोस्ट.....आप को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@हास्यकविता/ जोरू का गुलाम

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर है रचना होली की -

    देवर-भाभी में होती है, जमकर आँख-मिचौली,
    गली-गाँव में घूम रहीं हैं हुरियारों की टोली,

    उत्तर देंहटाएं

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