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शुक्रवार, 21 मार्च 2014

"विविध दोहावली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माँ के कोमल हृदय कोसुत देते संताप।
अपशब्दों को बोलकरभर देते अवसाद।१।

मेरे सपने में सजाफिर से दिलकश चाँद।
है मेरे दिलदार कीचिकनी-चिकनी चाँद।२।

अब कैसे नव सृजन होमनवा है हैरान।
अन्धकूप पैंठ करखोज रहे हैं ज्ञान।३।

तन-मन को गद-गद करेअनुशंसा का भाव।
तारीफों के शब्द सेजल्दी भरते घाव।४।

स्वार्थ भरे इस जगत मेंजीवित है परमार्थ।
युगों-युगों के बाद हीआता जग में पार्थ।५।

मुक्त नहीं हो पाओगेकर लो यत्न अनेक।
छोड़ ईर्ष्या-द्वेष कोकाम करो कुछ नेक।६।

वेदों के सन्देश परनतमस्तक हैं लोग।
जीवन के हर क्षेत्र मेंमन्त्रों का उपयोग।७।

6 टिप्‍पणियां:

  1. सबके ही लिये उपयोगी हैं, जीवन के ये मन्त्र।

    उत्तर देंहटाएं
  2. संक्षेप में बहुत-कुछ कह जाते हैं ये दोहे !

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (24-03-2014) को ''लेख़न की अलग अलग विद्याएँ'' (चर्चा मंच-1561) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

    उत्तर देंहटाएं

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