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शनिवार, 8 मार्च 2014

"नारी दिवस पर कुछ दोहे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 
लालन-पालन में दिया, ममता और दुलार।
बोली-भाषा को सिखा, माँ करती उपकार।।

हर हालत में जो रहे, कोमल और उदार।
पत्नी-बेटी-बहन का, नारी देती प्यार।।

मत उसको अबला कहो, वो है बल से युक्त।
नारी के ऋण से नहीं, हो पायेंगे मुक्त।।

होता है सन्तान का, सीधा है सम्वाद।
माता को करते सभी, दुख आने पर याद।।

जगदम्बा के रूप में, रहती है हर ठाँव।
माँ के आँचल में सदा, होती सुख की छाँव।।

नारायण से भी बड़ी, नारी की है जात।
सृजन कर रही सृष्टि का, इसीलिए है मात।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. मानवता में कहीं कुछ भी अच्छा है वो नारी का दिया है...सॉफ्ट स्किल्स हमें अपनी महिलाओं से ही मिलीं हैं...माँ की सीख, बहनों के प्यार से लेकर...प्रेमिका/पत्नी के झाड़ पर चढाने तक...

    उत्तर देंहटाएं
  2. नारी महात्म्य पर सुन्दर दोहे।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भेंट नारी दिवस पर :

    नारायण से भी बड़ी, नारी की है जात।
    सृजन कर रही सृष्टि का, इसीलिए है मात।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. aap k in doho se hi kuch ya bahoot se jan jaag jay supt chetna cheta d insaniyat unki....
    such kahte hai aap nar ko srijit karti sb hetu tatpar rahti dene ko pradan-nari se gar nar nikal le to bhi somya kuch na kehti per asmita pr aay baat ho jati Aaari****

    उत्तर देंहटाएं

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