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सोमवार, 31 मार्च 2014

"मंगलमय नववर्ष" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


नवसम्वत्सर सभी का, करे अमंगल दूर।
देश-वेश परिवेश में, खुशियाँ हों भरपूर।।

शंकाएँ सब दूर हों, हो आपस में मेल।
मन के उपवन में सदा, बढ़े प्रेम की बेल।।

एक मंच पर बैठकर, करें विचार-विमर्श।
अपने प्यारे देश का, कैसे हो उत्कर्ष।।

मर्यादा के साथ में, खूब मनाएँ हर्ष।
बालक-वृद्ध-जवान को, मंगलमय नववर्ष।। 

1 टिप्पणी:

  1. मर्यादा के साथ में, खूब मनाएँ हर्ष।
    बालक-वृद्ध-जवान को, मंगलमय नववर्ष।।

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...!

    RECENT POST - माँ, ( 200 वीं पोस्ट, )

    उत्तर देंहटाएं

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