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सोमवार, 24 मार्च 2014

"ग़ज़ल-हमको अपना बना गया कोई" (गुरूसहाय भटनागर बदनाम)

आज एक ग़ज़ल
गुरूसहाय भटनागर बदनाम की कलम से
अपना बना गया कोई
 
अपना ज़लवा दिखा गया कोई
दिल को हँसकर जला गया कोई

दर्दे ग़म फिर बढ़ा गया कोई
हम को अपना बना गया कोई

कल जो करता था प्यार के वादे
आज नज़रें चुरा गया कोई

वो जो रुकता तो बात कर लेते
बिन बताए चला गया कोई

याद उल्फ़त की अब सताती है
मेरे आँसू बहा गया कोई

उनका बदनामजिक्र अब छोड़ो
बेवफ़ा था रुला गया कोई
(गुरूसहाय भटनागर बदनाम)

9 टिप्‍पणियां:

  1. बदनाम जी !होली की वधाई ! रचना में रस भी है भावना भी !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या बात है। लाजवाब प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ''badnam '' ji kee gazal bahut hi sateek v sundar lagi .is prastuti hetu aapka hardik aabhar

    उत्तर देंहटाएं

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