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गुरुवार, 13 मार्च 2014

"रंगों की बरसात लिए होली आई है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

खुशियों की सौगात लिए होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

रंग-बिरंगी पिचकारी ले,
बच्चे होली खेल रहे हैं।
मम्मी-पापा दोनों मिल कर,
मठरी-गुझिया बेल रहे हैं।
पकवानों को साथ लिए, होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

जाड़ा भागा, गरमी आई,
होली यह सन्देशा लाई।
कोयल बोल रही बागों में,
कौए ने पाँखे खुजलाई।
ठण्डी कुल्फी हाथ लिए, होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

सरसों फूली, टेसू फूले,
आम-नीम बौराये हैं।
मक्खी, मच्छर भी होली का,
राग सुनाने आये हैं।
साथ चाँदनी रात लिए, होली आई है।
रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.03.2014) को "रंगों की बरसात लिए होली आई है (चर्चा अंक-1551)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है, धन्यबाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. रंगो की बरसात लिये होली आई ....... वाह बहुत ही बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुहानी होली आई .
    बहुत शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर होली गीत।
    होली की हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर रागात्मक कविता :

    सरसों फूली, टेसू फूले,
    आम-नीम बौराये हैं।
    मक्खी, मच्छर भी होली का,
    राग सुनाने आये हैं।
    साथ चाँदनी रात लिए, होली आई है।
    रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मुबारक हो मुबारक दिन जुग जुग जियो पोती संग

    उत्तर देंहटाएं

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