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शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

दोहे "बुरे वचन मत बोल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

Image result for कपास की खेती
कभी चढ़ाई है यहाँ, होता कभी ढलान।
नहीं समझना सरल कुछ, जीवन का विज्ञान।।
--
सच्ची होती मापनी, झूठे सब अनुमान।
ताकत पर अपनी नहीं, करना कुछ अभिमान।।
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कंचन काया को कभी, माया से मत तोल।
दौलत के अभिमान में, बुरे वचन मत बोल।।
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कभी “रूप” की धूप पर, मत करना अभिमान।
डरकर रहना समय से, समय बड़ा बलवान।।
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नहीं झेल पाया मनुज, कभी समय का वार।
ज्ञानी, राजा-रंक भी, गये समय से हार।।
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दाता के है हाथ में, सकल जगत की डोर।
हरदम उसकी रजा में, रहना भाव-विभोर।।
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कुदरत के कानून से, बचा न अब तक कोय।
जो चाहें भगवान जी, वैसा जग में होय।।
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सबसे सुन्दर जगत में, होता फूल कपास।
जीवन में इस सुमन से, छा जाता उल्लास।।
  

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 16 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... पांच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    सादर
    ज्ञान द्रष्टा

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 16 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... पांच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    सादर
    ज्ञान द्रष्टा

    उत्तर देंहटाएं

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