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सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

गीत "ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कर रही हूँ प्रभू से यही प्रार्थना।
ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।

चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,
उन्नति की सदा सीढ़ियाँ तुम चढ़ो,
आपकी सहचरी की यही कामना।
ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।

आभा-शोभा तुम्हारी दमकती रहे,
मेरे माथे पे बिन्दिया चमकती रहे,
मुझपे रखना पिया प्यार की भावना।
ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।

तीर्थ और व्रत सभी हैं तुम्हारे लिए,
चाँद-करवा का पूजन तुम्हारे लिए,
मेरे प्रियतम तुम्ही मेरी आराधना।
ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।



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