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सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

गीत "भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर,
कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।
लग जाये किसी की न तुमको नजर,
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,
उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,
कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,
सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
पूर्ण हों भाइयों की सभी साधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

1 टिप्पणी:

  1. रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
    नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
    आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
    दूज के इस तिलक में यही भावना।।

    जवाब देंहटाएं

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