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रविवार, 29 जुलाई 2018

"पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पूज्य पिता जी आपको श्रद्धापूर्वक नमन।
2014 में आज ही के दिन आप विदा हुए थे।
-- 
पूज्य पिता जी आपकावन्दन शत्-शत् बार।
बिना आपके हो गयाजीवन मुझ पर भार।।
एक साल बीता नहींमाँ भी गयी सिधार।
बिना आपके हो रहादुखी बहुत परिवार।।
--
बचपन मेरा खो गयाहुआ वृद्ध मैं आज।
सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।
--
जब तक मेरे शीश पररहा आपका हाथ।
लेकिन अब आशीष काछूट गया है साथ।।
--
प्रभु मुझको बल दीजिएउठा सकूँ मैं भार।
एक-नेक बनकर रहेमेरा ये परिवार।।
You

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (30-07-2018) को "झड़ी लगी बरसात की" (चर्चा अंक-3048) (चर्चा अंक-3034) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    पूज्य पिता जी को नमन।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक साल बीता नहीं, माँ भी गयी सिधार।
    कितनी वेदना समाई है इन शब्दों में आदरणीय सर | नमन पूज्य पिताजी और माता जी को |

    उत्तर देंहटाएं
  3. नमन है माता जी और पिता जी को ...
    बस यादें रह जाती हैं अक्सर ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. पिता एक निस्वार्थ छाता जिसकी छाँव और आश्रय से बाहर होते ही व्यक्ति नितांत अकेला आश्रयहीन रह जाता है। फिर भी पिता एक श्री राम सबके हर दम राम। हमें अपनी शरण में ले लो राम।

    उत्तर देंहटाएं

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