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गुरुवार, 26 जुलाई 2018

दोहे "कौन सुखी परिवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रिश्तो-नातों से भरा, सारा ही संसार।
प्यार परस्पर हो जहाँ, वो होता परिवार।।

सम्बन्धों में हों जहाँ, छोटी-बड़ी दरार।
धरती पर कैसे कहें, कौन सुखी परिवार।।

एक दूसरे के लिए, रहो सदैव उदार।
प्यार सुखी परिवार का, होता है आधार।।

अपने कुनबे में करो, कभी न झूठा प्यार।
सबके प्रति परिवार में, हों सच्चे उद्गार।।

कोई भी परिवार हो, कोई देश-समाज।
अवसर के अनुकूल ही, वहाँ बजाओ साज।।

एक-नेक रहता वही, दुनिया में परिवार।
जहाँ दिलों में हों भरे, सबके नेक विचार।।


 दिन रहे

1 टिप्पणी:



  1. एक दूसरे के लिए, रहो सदैव उदार।
    प्यार सुखी परिवार का, होता है आधार।।
    पूजन शिव परिवार का जीवन का आधार क्यों ?

    क्योंकि शिव के परिवार में परिवार का मुखिया सारा विष पी जाता है। सबकी सुनता है उसकी अपनी राय सबसे बाद में आती है। इस परिवार में मूषक राज हैं वाहन बने गणेश के निर्भय रहते सर्प से। मयूर है वाहन शिव जी के बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय का जो यहां इस परिवार में सर्प को कुछ नहीं कहता हालांकि खाद्य श्रृंखला में मोर का भोजन सर्प तथा सर्प का मूषक (चूहा )है। शेरावाली का शेर (बाघ भी कहीं दुर्गा -पार्वती का वाहन दिखाया गया है )यहां शिव के वाहन नंदी को कुछ नहीं कहता। सब एक दूसरे की सुनते हैं परस्पर प्रेम है सद्भाव है। शिव सबकी सुनते हैं उनकी अपनी कोई मर्जी नहीं है वही सुखी परिवार हैं जहां मुखिया सबकी सुने। सबको बांधे रहे एक डोर से।

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