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सोमवार, 30 जुलाई 2018

गीत "सावन आया रे...." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

साजन ला दो चोटी-बिन्दी, काजल काली-काली,
क्रीम-पाउडर के संग में, ला दो होठों की लाली,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

तन भी भीगा, मन भी भीगा, भीगा मेरा आँचल,
कजरारी अँखियों में सुन्दर लगता सबको काजल,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

भीनी-भीनी मस्त फुहारें, पड़ती हैं आँगन में,
गाऊँगी मैं गीत प्रणय के, हरे-भरे कानन में,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

हरियाली तीजो पर झूले पड़े हुए उपवन में,
इन्द्रधनुष भी सजे हुए हैं देखो नीलगगन में,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

भीगे खेतों में खुश हो कर धान बहुत लहराते,
बारिश का पानी पी करके मेढक भी टर्राते,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

थोड़े दिन में राखी लेकर, मैं मैके जाऊँगी,
अम्मा-बाबा, भइया-भाभी से मिलकर आऊँगी,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

गंगा-यमुना की धाराएँ, कल-कल राग सुनातीं,
जल को पाकर सूखी नदियाँ, बहती हैं बलखातीं,
सावन आया रे.... मस्ती लाया रे....!

4 टिप्‍पणियां:

  1. सावन के सभी रंगो का सजीव चित्रण ,,

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  2. सुंदर मनभावन सावन गीत। सादर प्रणाम।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर सावनी छटा, लेकिन रूठा है, बरस नहीं रहा

    उत्तर देंहटाएं
  4. सावन के भांति सुरंगा सावन गीत ।

    उत्तर देंहटाएं

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