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बुधवार, 8 अप्रैल 2020

दोहे "हनुमान जयन्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सभी भक्तों को हनुमान जयन्ती की 
हार्दिक शुभकामनाएँ !
 
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।
--
महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।
असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।
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कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।
सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।
--
लछमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।
पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।।
--
संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल।
बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।।
--
बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।। 
--

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपको इस शुभ पर्व की अनेकानेक मंगलकामनाएं

    जवाब देंहटाएं

  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक कीचर्चा गुरुवार(०९-०४-२०२०) को 'क्या वतन से रिश्ता कुछ भी नहीं ?'( चर्चा अंक-३६६६) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर लाजवाब दोहे .... प्रभू की महिमा बखान कर रहे हैं ...
    बहुत बधाई महावीर जयंती की ...

    जवाब देंहटाएं
  4. बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
    कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।

    बहुत सुंदर प्रार्थना ,सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं
  5. श्रीराम जी के अनन्य भक्त हनुमान जी को समर्पित भावपूर्ण दोहे।

    सादर नमन सर।

    जवाब देंहटाएं

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