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रविवार, 5 अप्रैल 2020

दोहे "मुल्लाओं की घात" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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खोटी जब तकदीर हो, खोटी हों तकरीर।
कठमुल्लाओं की पड़ी, खतरे में जागीर।।
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नहीं चलेगी मौलवी, मुल्लाओं की घात।
शैतानों की देश में, बिगड़ रही औकात।।
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देशद्रोह जो कर रहे, कुछ मुल्लाह-इमाम।
उनकी सारी सम्पदा, कर दो अब नीलाम।।
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नहीं मिलेगी हाट में, इन्सानियत-तमीज।
बाँध लीजिए गले में, करमों का ताबीज।।
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नदियाँ-सूरज-चन्द्रमा, देते ये पैगाम।
नित्य-नियम से कीजिए, अपना सारा काम।।
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नहीं पिछड़ने दीजिए, अपना कोई काम।
दिन में करना काम को, रातों को आराम।।
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होते हैं सत्कर्म ही, जग में सच्चे मीत।
वर्तमान में कीजिए, अपने कर्म पुनीत।।
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7 टिप्‍पणियां:

  1. इनको तुरंत जेल भेज देना चाहिए और मुकदमा कर देना चाहिए।

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (06 -04-2020) को 'इन दिनों सपने नहीं आते'(चर्चा अंक-3663) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. सार्थक सामयिक दोहे। सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खूब.... सर ,सादर नमस्कार

    जवाब देंहटाएं
  5. सटीक और सच का बयान
    अच्छे दोहे
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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