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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

ग़ज़ल " कोरोना को हराना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सभी को बैठकर घर में, कोरोना को हराना है
हमें हर हाल मे,  अब जिन्दगी अपनी बचाना है
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अलग रहकर समूहों से, दिखाना अपनी ताकत को
सफल अभियान को करके, महामारी भगाना है
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हमारी एक कोशिश से, भला होगा जमाने का
गुजर जायेंगे दुख के दिन, तो अच्छा वक्त आना है
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जरूरी वस्तुएँ भरपूर हैं, अपने वतन में सब
प्रशासन की मदद से, जींस लोगों को दिलाना है
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महामारी से लड़ना है, हमें हर हाल में अब तो
बचावों के तरीकों को, हमें सबको अब बताना है
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हमारे लॉकडाउन से, जमाना सीख लेता है
सफल अभियान हमको, लॉकडाउन का बनाना है
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अभी नाजुक फिजायें हैं, घरों में सब रहें अपने
हमें हर हाल में अब रूप को, अपने बचाना है
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