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रविवार, 19 अप्रैल 2020

बालगीत "सबके मन को भाते आम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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एक साल में आते आम।
सबके मन को भाते आम।।
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जब वर्षा से आँगन भरता,
स्वाद बदलने को जी करता,
तब पेड़ों पर आते आम।
सबके मन को भाते आम।।
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चटनी और अचार बनाओ,
पक जाने पर काटो-खाओ,
आम सभी के होते आम।
सबके मन को भाते आम।।
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कच्चा सबसे खट्टा होता,
पक जाने पर मीठा होता,
लंगड़ा वो कहलाते आम।
सबके मन को भाते आम।।
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बम्बइया की शान निराली,
खुशबू होती है मतवाली,
अपनी ओर लुभाते आम।
सबके मन को भाते आम।।
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5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी बाल प्रस्तुति
    आम की बात ही निराली है
    यह फल सबको भाता है
    तभी राजा कहलाता है

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (20-04-2020) को 'सबके मन को भाते आम' (चर्चा अंक-3677) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

    जवाब देंहटाएं
  3. आम तो मेरा पसंदीदा फल है लेकिन लगता है इस वर्ष खाने को नहीं मिलेगा। बहुत सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

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