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गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

बालगीत "मिलने आना तुम बाबा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


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पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
कैसे भूलें प्यार आपका,
नहीं सूझता कुछ बाबा।।
--
छोटा घर है, नया नगर है,
सर्द हवा चलती सर-सर है,
बन जायेंगे नये दोस्त भी,
अभी अकेले हैं बाबा।
पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
--
प्यारे चाचा-दादी जी की,
हमको याद सताती है,
विद्यालय की पीली बस भी,
गलियों में नहीं आती है,
भीड़ बहुत है इस नगरी में,
मँहगाई भी है बाबा।
पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
--
आप हमारे लिए रोज ही,
रचनाएँ रच देते हो,
बच्चों के मन की बातों को,
सहज भाव से कहते हो,
ब्लॉग आपका बिना नेट के,
कैसे हम देखें बाबा।
पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
--
मेरी छोटी बहना को,
बाबा-दादी प्यारी थी,
छोटी होने के कारण वो,
सबकी बहुत दुलारी थी।
बहुत अकेली सहमी सी है,
गुड़िया रानी जी बाबा।
पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
--
गर्मी की छुट्टी होते ही,
अपने घर हम आयेंगे,
जो भी लिखा आपने बाबा,
पढ़कर वो हम गायेंगे,
जब भी हो अवकाश आपको,
मिलने आना तुम बाबा।
पापा की लग गई नौकरी,
दूर नगर में अब बाबा।
--

11 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (24-04-2020) को "मिलने आना तुम बाबा" (चर्चा अंक-3681) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    जवाब देंहटाएं
  2. आप हमारे लिए रोज ही,
    रचनाएँ रच देते हो,
    बच्चों के मन की बातों को,
    सहज भाव से कहते हो,
    ब्लॉग आपका बिना नेट के,
    कैसे हम देखें बाबा।
    पापा की लग गई नौकरी,
    दूर नगर में अब बाबा।
    बह्त सुंदर रचना, आदरणीय शास्त्री जी।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदर रचना आदरणीय शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं
  4. दिल को छू गयी पंक्तियां आ0

    जवाब देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह , शानदार बालगीत । बाल मन के स्नेहिल उद्गारों की सशक्त व्यजना👌

    जवाब देंहटाएं
  7. आप हमारे लिए रोज ही,
    रचनाएँ रच देते हो,
    बच्चों के मन की बातों को,
    सहज भाव से कहते हो,
    ब्लॉग आपका बिना नेट के,
    कैसे हम देखें बाबा।
    पापा की लग गई नौकरी,
    दूर नगर में अब बाबा
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण बालगीत।

    जवाब देंहटाएं
  8. पापा की लग लगी नौकरी
    दूर नगर में अब बाबा ,बालमन की भावपूर्ण प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

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