"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

गीत "माता का भी मान करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--
माता का सम्मान करो,
जय माता की कहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।
--
झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,
ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो,
गंगा में स्नान करो,
कीचड़ में रहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।
--
बेटों के जैसा ही, बेटी से भी प्यार करो ना,
नारी से नर पैदा होते, ये भी ध्यान धरो ना,
मत जीवन बरबाद करो,
दुनिया में रहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।
--
दया-धर्म और क्षमा-सरलता, ही सच्चे गहने हैं,
दुर्गा-सरस्वती-लक्ष्मी ही, अपनी माता-बहनें हैं।
घर अपना आबाद करो,
पूजन-वन्दन करने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।
--

6 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी नमस्ते,
      आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (03-04-2020) को "नेह का आह्वान फिर-फिर!"
      (चर्चा अंक 3660)
      पर भी होगी।

      चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

      जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

      आप भी सादर आमंत्रित है

      हटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर गीत |
    रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें |

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर ज्ञानवर्धक दोहे ,सादर नमन आपको

    जवाब देंहटाएं
  4. झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,
    ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो>>>> सभी दोहे सुभाष‍ित ... बहुत खूब शास्त्री जी

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails