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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

गीत "5 दिसम्बर, हमारी 47वीं प्रणय जयन्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तुम कलिका हो मन उपवन की।
तुलसी हो मेरे आँगन की।।
 
तुमसे ही तोे ये घर, घर है,
सपनों का आबाद नगर है,
सुख-दुख में हो साथ निभाती,
आभा-शोभा तुमसे वन की।
संगी-साथी साथी इस जीवन की।।
 
तुम कोयल सी चहक रही हो,
तुम जूही सी महक रही हो,
नेह सुधा सरसाने वाली,
तुम घन चपला हो सावन की।
संगी-साथी साथी इस जीवन की।।
 
तुम शीतल बयार मतवाली,
पतझड़ में भी हो हरियाली,
जंगल चमन बनाया तुमने,
तुम आभा-शोभा उपवन की।
संगी-साथी साथी इस जीवन की।।
 
तुम हो प्यारे मीत हमारे,
तुम पर गीत रचे हैं सारे,
नाती-पोतों की किलकारी,
याद दिलाती है बचपन की।
संगी-साथी साथी इस जीवन की।।
 
युग बीता चालिस सालों का,
अब चाँदी सा रँग बालों का,
प्रणयदिवस के महापर्व पर,
यादें वाबस्ता यौवन की।
संगी-साथी साथी इस जीवन की।।
 
अमर भारती नाम तुम्हारा,
रूपतुम्हारा लगता है प्यारा,
मेरा मन मतवाला पंछी,
लेकिन तुम हो भोले मन की।
संगी-साथी साथी हो जीवन की।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०४-१२-२०२०) को 'निसर्ग को उलहाना'(चर्चा अंक- ३९०६) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. अति सुंदर रचना ! विवाह की चालीसवीं वर्षगांठ पर आप दोनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  3. अमर भारती नाम तुम्हारा,
    “रूप” तुम्हारा लगता है प्यारा,
    मेरा मन मतवाला पंछी,
    लेकिन तुम हो भोले मन की।
    संगी-साथी साथी हो जीवन की।।

    🌹☘️🌾⭐🔶⭐🌾☘️🌹

    आदरणीय शास्त्री जी आप को एवं आदरणीया भाभीजी भारती जी को विवाह की वर्षगांठ पर अनंत हार्दिक मंगलकामनाएं 🙏❤️🙏

    🌹☘️🌾⭐🔶⭐🌾☘️🌹

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  4. अत्यंत सुन्दर सृजन ।आप दोनों हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं🙏💐🙏

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह!!
    अद्भुत सृजन श्रृंगार रस के मन से निकले बोल सरस सुंदर अभिनव।

    जवाब देंहटाएं

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