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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

गीत "नव-वर्ष मनायें अब कैसे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हालत जैसे के हैं तैसे!
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
सत्याग्रह करते हैं किसान,
सरदी से काँप रहा है तन।
धनवानों के हिन में नियमन,
मनमानी करता है शासन।
लोकतन्त्र के जंगल में,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
राजा-वजीर हठधर्मी हैं,
मजबूर हो रहे खेतीहर।
जिनके बल पर सरकार बनी,
सड़कों पर वो सब हैं बेघर।
लाठी-डण्डे, भाषण खाते,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
जो करते श्रम का शीलभंग
वो खूब कमाते द्रव्य-माल।
कल तक थे भू के मालिक,
हो जायेंगे अब फटे हाल
खेती की बढ़ती लागत में,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
अच्छे दिन के कोरे सपने,
सम्पदा किनारा करती है 
निर्धन-निर्धन होते जाते,
महँगाई प्रतिदिन बढ़ती है।
क्या खायें और खिलाये अब,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
सरकारी नौकरियाँ दुर्लभ,
रोटी-रोजी का संकट है।
अब साल पुराना बीत रहा,
बस नये साल की आहट है।
झंझावातों की चहल-पहल,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--
तन भी मन भी टूटा,
बस अभिलाषा ही बाकी है,
सुमनों के आँगन उपवन में,
मक्कारी है चालाकी है।
छलिए भौरों की गुंजन में,
नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
--

13 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 01-01-2021) को "नए साल की शुभकामनाएँ!" (चर्चा अंक- 3933) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।
    धन्यवाद.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. सरकारी नौकरियाँ दुर्लभ,
    रोटी-रोजी का संकट है।
    अब साल पुराना बीत रहा,
    बस नये साल की आहट है।
    झंझावातों की चहल-पहल,
    नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
    सटीक।

    जवाब देंहटाएं
  3. यथार्थ की तल्ख़बयानी के साथ साथ गीत की कोमलता....
    शानदार मणि -कांचन योग
    साधुवाद आपके इस सृजन के प्रति आदरणीय शास्त्री जी 🙏🏻
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर सृजन सर ,आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  5. समसामयिक प्रश्नों को उद्घृत करती सुंदर रचना..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना सहित जिज्ञासा सिंह..।

    जवाब देंहटाएं
  6. सच के साथ सच्चाई को सामने लाती अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  7. विचारणीय प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. स्वाभाविक ही है ऐसा प्रश्न उठना।
    🙏नववर्ष 2021 आपको सपरिवार शुभऔर मंगलमय हो 🙏

    जवाब देंहटाएं
  9. नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
    –गम्भीर सवाल है
    1 जनवरी ही तो नया नहीं हर दिन नया है
    पल और नियति जो तय करें
    बस मुस्कान बनी रहे

    –वन्दन

    जवाब देंहटाएं
  10. झंझावातों की चहल-पहल,
    नव-वर्ष मनायें अब कैसे!...वा‍ह शास्त्री जी नववर्ष के सामने आपकेे दोहों ने कई चुनौत‍ियां रख दीं नववर्ष की हार्द‍िक शुभकामनायें

    जवाब देंहटाएं
  11. अच्छे दिन के कोरे सपने,
    सम्पदा किनारा करती है।
    निर्धन-निर्धन होते जाते,
    महँगाई प्रतिदिन बढ़ती है।
    क्या खायें और खिलाये अब,
    नव-वर्ष मनायें अब कैसे!
    बहुत सुंदर और विचारणीय प्रस्तुति..!
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

    जवाब देंहटाएं
  12. तन भी मन भी टूटा,
    बस अभिलाषा ही बाकी है,
    सुमनों के आँगन उपवन में,
    मक्कारी है चालाकी है।
    छलिए भौरों की गुंजन में,
    नव-वर्ष मनायें अब कैसे!

    वर्तमान दशा पर बहुत सटीक कटाक्ष करती रचना... गहन चिंतन योग्य!!!

    नववर्ष पर आपको सादर नमन 🌹🙏🌹
    वर्ष 2021 आपके लिए शुभकारी हो ⭐🌹🙏🌹⭐

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर सृजन - - नूतन वर्ष की असंख्य शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं

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