क्यों है अँधियारा उपवन में?
सूरज क्यों दिन में
शर्माया?
भरी दुपहरी में क्यों छाया?
चन्दा गुम क्यों बिना अमावस?
नजर नही आती क्यों पावस?
क्यों है धरती रूखी-रूखी?
क्यों है खेती सूखी-सूखी?
छागल क्यों हो गई विदेशी?
पागल क्यों है आज स्वदेशी?
कहाँ गयी माता की बिन्दी?
सिसक रही क्यों अपनी हिन्दी?
प्यारी भाषा बहक रही क्यों?
अंग्रेजी ही चहक रही क्यों?
कहने भर की आजादी है!
आज वतन की बर्बादी है!!
नजर न आता कहीं अमन है!
दागदार हो गया चमन है!!
कहाँ हो गई चूक भयंकर?
विष उडेलते हैं क्यों शंकर?
रक्षक जब उत्पात मचाये!
विपदाओं से कौन बचाये?
आस लगाये यशोदा मइया!
आ जाओ अब कृष्ण-कन्हैया!!
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कृष्ण जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
जवाब देंहटाएंकहने भर की आजादी है!
जवाब देंहटाएंआज वतन की बर्बादी है!!
नजर न आता कहीं अमन है!
दागदार हो गया चमन है!!
कहाँ हो गई चूक भयंकर?
विष उडेलते हैं क्यों शंकर?
रक्षक जब उत्पात मचाये!
विपदाओं से कौन बचाये?
आस लगाये यशोदा मइया!
आ जाओ अब कृष्ण-कन्हैया!!
हार्दिक शुभकामनाएँ
बहुत सुंदर रचना !
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएँ !
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें,सादर!!आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (29-08-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : शतकीय अंक" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति...
जवाब देंहटाएंजय श्री कृष्णा...
:-)
सुन्दर अभिव्यक्ति...
जवाब देंहटाएंकृष्ण जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
एक बड़ी अच्छी रचना के लिये धन्यवाद. श्रीकॄष्ट जन्माष्टमी पर शुभकामनायें.
जवाब देंहटाएंश्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंआपको ढेरों शुभकामनायें..
जवाब देंहटाएंवाह---- दिल के सारे जख्मों को उड़ेल दिया लाजवाब ---आमीन -
जवाब देंहटाएं
जवाब देंहटाएं♥ जय श्री कृष्ण ♥
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♥ जय श्री कृष्ण ♥
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बधाइयां और शुभकामनाएं !
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आस लगाये यशोदा मइया!
आ जाओ अब कृष्ण-कन्हैया!!
वर्तमान परिस्थितियों को ले'कर
अच्छी रचना के माध्यम से कृष्ण के आह्वान के लिए
आदरणीय शास्त्री जी आपका आभार !
सुंदर रचना के लिए साधुवाद
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मंगलकामनाओं सहित...
राजेन्द्र स्वर्णकार
हार्दिक शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंwahh uttam rachna ..samyik sarthaak ..
जवाब देंहटाएंsadar naman :)