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रविवार, 9 फ़रवरी 2014

"2000वीं पोस्ट-दोहागीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“दोहागीत”
रही धरा से सूख अब, गीत-ग़ज़ल की धार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

कैसे देंगे गन्ध को, ये काग़ज़ के फूल।
सुमन नोच माली चला, छोड़ गया अब शूल।।
मन में तो है कुटिलता, अधरों पर मुस्कान।
अपनेपन की हो यहाँ, कैसे अब पहचान।।
पहले जैसी हैं कहाँ, अब निश्छल मनुहार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

बेटों ने परदेश में, जमा किया धन-माल।
सोनचिरैया इसलिए, हुई आज कंगाल।
खाते कुत्ते-बिल्लियाँ, बिस्कुट-बटर-पनीर।
लेकिन बूढ़े पिता की, आँखों में है नीर।।
शादी होते ही हुआ, अलग-अलग घर-बार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

सरगम के सुर कर रहे, आपस में उत्पात।
कदम-कदम पर हो रहा, घात और प्रतिघात।।
पाल-पोषकर कर दिया, जिसको युवा बलिष्ठ।
वो ही अब करने लगा, घर का बहुत अनिष्ट।।
बेटा जीवित बाप से, माँग रहा अधिकार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

नज़र न आता है कहीं, अब नैसर्गिक “रूप”।
कृत्रिमता के दौर में, मिले कहाँ से धूप।।
लोग बुन रहे देश में, मकड़ी जैसा जाल।
अब दूषित परिवेश में, जीना हुआ मुहाल।।
मानवीयता का यहाँ, खसक रहा आधार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर ..... २००० वीं पोस्ट की बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति ………२००० वीं पोस्ट की बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही रोचक दोहे.......२०००वी पोस्ट के लिए बधाइयां .....

    उत्तर देंहटाएं
  4. इसी तरह बहाते चलिये सुंदर शब्दों की गँगा 2000 से 20000 तक शुभकामनाऐं और बधाई भी बहुत बहुत !

    उत्तर देंहटाएं
  5. मुबारक हो २००० वीं पोस्ट...बहुत ही प्रेरणादायी कार्य...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर एवं सार्थक दोहे !
    २०००वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई !

    ~सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुन्दर,हृदयस्पर्शी दोहे...
    २००० वीं पोस्ट की बधाई!!
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं

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