"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शनिवार, 15 फ़रवरी 2014

"वही वो हैं वही हम हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

OLYMPUS DIGITAL CAMERA
वही चौपाल-चौबारे,
वही गलियाँ, वही द्वारे,
मगर इन्सान बेदम हैं!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!

वही गुलशन वही कलियाँ,
वही फूलों भरी डलियाँ,
घटी खुशियाँ, बढ़े ग़म हैं!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!

हँसी झूठी, कमर टूटी,
लबों पर बेबसी फूटी,
नज़ारों की नज़र नम है!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!

वही पत्ते, वही डाली,
वही भोजन, वही थाली,
वही वो हैं वही हम हैं!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!

14 टिप्‍पणियां:

  1. वही गर्दिश वही गलताँ वही गर्दो-गुबारे..,
    वही महताब वही तनाब वही सीम सितारे..,
    वही आलमों-अलमस्त वही बादे-बहारें..,
    तन्हाई का आलम है दिलों में उल्फत कम है.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक सार्थक अभिव्यक्ति.....बहुत बढ़िया.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वही पत्ते, वही डाली,
    वही भोजन, वही थाली,
    वही वो हैं वही हम हैं!
    दिलों में उल्फतें कम हैं!!

    सुन्दर !आशय और बदलाव का दर्द !लिए है रचना


    वही पत्ते, वही डाली,
    वही भोजन, वही थाली,
    वही वो हैं वही हम हैं!
    दिलों में उल्फतें कम हैं!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. हँसी झूठी, कमर टूटी,
    लबों पर बेबसी फूटी,
    नज़ारों की नज़र नम है!
    दिलों में उल्फतें कम हैं!! khas aur sundar prastuti hetu aabhar Mayank ji

    उत्तर देंहटाएं
  6. कल 17/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  7. नज़ारों की नज़र नम है!
    दिलों में उल्फतें कम हैं!!

    जय हिन्द !

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails