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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

"दोहे-प्रेमदिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रेम दिवस पर सभी को, लगा प्रेम का रोग।
झूठे मन से कर रहे, प्रणय-निवेदन लोग।१।
--
प्रेमदिवस के रंग में, रँगा देश है आज।
छोड़ स्वदेशी सभ्यता, पागल हुआ समाज।२।
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आवारा षटपद हुए, कलियाँ हैं हैरान।
इन्सानों के भेष में, घूम रहे हैवान।३।
--
प्रेमदिवस पर छा गये, इन्द्रधनुष के रंग।
पंछी उड़ते पंखबिन, बदले जीवन ढंग।४।
--
प्यार नहीं है वासना, यह अभिनव उपहार।
करना है तो कीजिए, दिल से सच्चा प्यार।५।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 15/02/2014 को "शजर पर एक ही पत्ता बचा है" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1524 पर.

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रेमदिवस पर छा गये, इन्द्रधनुष के रंग।
    पंछी उड़ते पंखबिन, बदले जीवन ढंग।४।
    सुन्दर...
    :-)

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रेम दिवस के सतही खोखलेपन को बखानते सार्थक दोहे ! सुन्दर प्रस्तुति ! बधाई शास्त्रीजी !

    जवाब देंहटाएं
  4. हर दिन, हर पल, प्रेम सुवासित जीवन हो।

    जवाब देंहटाएं
  5. प्रेम एक दिन का नहीं सद सर्वदा के लिए होता है ...बढ़िया दोहे !
    new post बनो धरती का हमराज !

    जवाब देंहटाएं
  6. प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति.......

    जवाब देंहटाएं
  7. वही पत्ते, वही डाली,
    वही भोजन, वही थाली,
    वही वो हैं वही हम हैं!
    दिलों में उल्फतें कम हैं!!

    बढ़िया निवेदन और चित्र प्रेम -प्रस्ताव दिवस का ,देह अनुराग दिवस ,बन जाता कुछ के लिए संत्रास दिवस।

    जवाब देंहटाएं
  8. 17-yr-old Delhi girl lured to V -Day party ,raped TOI ,TIMES NATION ,P7 ,THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,EPAPER.TIMESOFINDIA.COM

    जवाब देंहटाएं
  9. एक दिन चढ़नेवाला ज्वार कहें अगर इस दिवस को ?

    जवाब देंहटाएं

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