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शुक्रवार, 6 मार्च 2009

प्यार का मौसम आया। (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

आया रंगों का त्योहार,
छाई बागों में बहार,

प्यार का मौसम आया।


भरी ताजगी तन और मन में,

सुन्दर सुमन खिले मधुबन मे,

कोयल करती है पुकार,

सजनी करती है मनुहार,

प्यार का मौसम आया।


घर-आँगन में परिवेशों मे,

पंडित जी के उपदेशों में,

भरी हैं फागुन की फुहार,

चल रही मस्ती भरी बयार,

प्यार का मौसम आया।



गेहूँ पर बाली हैं आयी,

आमों में अमराई छायी,

होली भरती है हुंकार,

आओ जी भर करलें प्यार,

प्यार का मौसम आया।

17 टिप्‍पणियां:

  1. होली का मौसम आया है,
    या कि मिलन-मधुमास!
    सजनी बैठी पास में,
    करती है मधुरास!

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर ! आपको होली की शुभकामनाएँ !
    घुघूती बासूती

    जवाब देंहटाएं
  3. sach aapne to pyar ke mausam ko sakar kar diya.bahut badhiya.

    जवाब देंहटाएं
  4. सादर ब्लॉगस्ते,
    कृपया पधारें व 'एक पत्र फिज़ा चाची के नाम'पर अपनी टिप्पणी के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करें।

    आपकी प्रतीक्षा में...

    जवाब देंहटाएं
  5. प्यार का मौसम और
    रंगों का त्योहार होली ।
    बढ़िया प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  6. कविता अच्छी लगी।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी!
    प्यार का मौसम आया
    एक बेहतरीन होली का तोहफा है।
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  8. होली के पर्व पर सुन्दर गीत के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. मुझे यह होली गीत अच्छा लगा।
    लिखते रहें।

    जवाब देंहटाएं
  10. गेहूँ पर बाली हैं आयी,
    आमों में अमराई छायी,
    होली भरती है हुंकार,
    आओ जी भर करलें प्यार,
    प्यार का मौसम आया।


    यह पंक्तियाँ दिल को भा गयीं।

    जवाब देंहटाएं
  11. गेहूँ पर बाली हैं आयी,
    आमों में अमराई छायी,
    होली भरती है हुंकार,
    आओ जी भर करलें प्यार,
    प्यार का मौसम आया।


    यह पंक्तियाँ दिल को भा गयीं।

    जवाब देंहटाएं
  12. सुमितजी ने मेरी एक रचना के लिए भी
    हूबहू ऐसी ही टिप्पणी की है।
    मतलब - कॉपी-पेस्ट करते चले जा रहे हैं
    महाशय, बिना रचना पढ़े।
    इन्हें मैने यह उत्तर दिया है -

    सुमितजी,
    बात कुछ जमी नहीं!
    यह भी कोई सही तरीका है टिप्पणी करने का?
    आप मुझसे टिप्पणी करने के लिए कह रहे हैं,
    पर आपने क्या किया है?
    मात्र अपने ब्लॉग का विज्ञापन!
    कृपया, प्रतीक्षा न करें।
    जिस तरह की टिप्पणी आपने की है,
    इस तरह की टिप्पणी करना मुझे नहीं आता।

    जवाब देंहटाएं
  13. मयंक जी बहुत सुन्दर रचना पेश की है, आभार!

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने ....होली की शुभकामनाएँ !

    जवाब देंहटाएं
  15. 'होली aayi...
    रंग layi,
    masti chhayee..
    कविता bhaayee! '

    aap ke hi andaaz mein ek tippani likhne ki koshish ki Sir,

    :)
    Holi ki dher sari shubhkamnayen!

    जवाब देंहटाएं
  16. होली का सुन्दर रंग बिखरा है इस रचना में बहुत बढ़िया

    जवाब देंहटाएं

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