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मंगलवार, 31 मार्च 2009

‘‘.....................बदल जाते हैं।’’ (डा. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)

युग के साथ-साथ, सारे हथियार बदल जाते हैं।

नौका खेवन वाले, खेवनहार बदल जाते हैं।

प्यार-मुहब्बत के वादे, सब नही निभा पाते हैं,

नीति-रीति के मानदण्ड, व्यवहार बदल जाते हैं।

‘कंगाली में आटा गीला’, भूख बहुत लगती है,

जीवन यापन करने के, आधार बदल जाते हैं।

जप-तप, ध्यान-योग, केवल, टीवी, सीडी. करते हैं,

पुरुष और महिलाओं के, संसार बदल जाते हैं।

क्षमा, सरलता, धर्म-कर्म ही सच्चे आभूषण हैं,

आपा-धापी में निष्ठा के, तार बदल जाते हैं।

फैशन की अंधी दुनिया ने, नंगापन अपनाया,

बेशर्मी की गफलत में, श्रंगार बदल जाते हैं।

माता-पिता तरसते रहते, अपनापन पाने को,

चार दिनों में बेटों के, घर-द्वार बदल जाते हैं।

भइया बने पड़ोसी, वैरी बने जिन्दगी भर को,

भाई-भाई के रिश्ते औऱ, प्यार बदल जाते हैं।

15 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी सक्रियता की
    जितनी प्रशंसा की जाए,
    वह कम है!

    जवाब देंहटाएं
  2. एक से नही चलेगा,दो टिप्प्ढियां मिला कर लिख रहा हूं।
    १.काका हाथरसी ने कहा था:
    "यदि अगं प्रदर्शन ही फ़ैशन है तो हम बडे अभागे हैं,
    जानवर इस दौड में हम से बहुत आगे हैं।"
    २.पता नहीं किसने कहा है:
    "हम विश्व बन्धुत्व की भावना को अच्छी तरह जानते हैं।
    अत:अपने भाई को छोड सबको सगा भाई मानते हैं।"
    आपकी रचना भा्वों को प्रेरित करती है

    जवाब देंहटाएं
  3. शास्त्री जी!
    माँ शारदे का आपको आशीर्वाद मिला हुआ है।
    आप जो भी लिखेंगे।
    बेहतरीन होगा।
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  4. मयंक भैया।
    आपका गीत भावपूर्ण हैं। बधाई स्वीकार करें।

    जवाब देंहटाएं
  5. शास्त्री जी। गीत पसन्द आया।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. एक और अच्छे गीत के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  7. जीवन के विविध रूप लिए रचना सुन्दर है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुन्दर भावों को लिए गीत मन मोहक है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. माता-पिता तरसते रहते, अपनापन पाने को,

    चार दिनों में बेटों के, घर-द्वार बदल जाते हैं।
    भइया बने पड़ोसी, वैरी बने जिन्दगी भर को,
    भाई-भाई के रिश्ते औऱ, प्यार बदल जाते हैं।
    bahut hi sunder

    जवाब देंहटाएं
  10. पूरी रचना भाव प्रधान है ।
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  11. kitni saralta se aapne aaj ka yatharth kah diya.
    aage kahne ko kuch bacha hi nhi.

    जवाब देंहटाएं
  12. "फैशन की अंधी दुनिया ने, नंगापन अपनाया,

    बेशर्मी की गफलत में, श्रंगार बदल जाते हैं।"

    बहुत सुन्दर!!

    जवाब देंहटाएं
  13. कल 18/04/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    जवाब देंहटाएं

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