"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 18 मार्च 2009

चुनावी वायदा, कितना जनता का फायदा.... (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

एक नेता जी,

चुनाव में हो गये खड़े,

पहले करो कुछ वायदे,

लोग इस बात पर थे अड़े।

नेता जी ने गहराई से,

बहुत सोचा और विचारा,

उनके पास,

चुनाव जीतने के लिए,

नही था कोई चारा।

इसलिए,

जनता से करने चल पड़े,

कुछ वायदे,

क्योंकि,

सिर्फ कुर्सी ही पहुँचा सकती है,

उन्हें फायदे।

उन्होंने जनता से कहा

कि मैं हूँ हरिश्चन्द्र सत्यवादी,

तन-मन मैला है,

इसीलिए पहनता हूँ,शुद्ध खादी।

भाइयों,मैं वचन भरता हूँ,

चुनाव जीतने पर,

मेल ट्रेन को,

इस स्टेशन पर,

रुकवाने का वायदा करता हूँ।

नेता चुनाव में विजयी हो गया,

और उसका,

जनता से किया वायदा

भी पूरा हो गया।

अब मेल ट्रेन,

इस छोटे स्टेशन पर रुकने लगी है,

एक बड़ी उपलब्धि हो गयी है,

किराया ऐक्सप्रैस का और,

मेल ट्रेन पैसेन्जर हो गयी है।

अब जनता करती है,

किराया कम करने की फरियाद,

नेता जी, दिलाते हैं याद।

हमने अपने शासन में,

बहुत विकास किया है,

परन्तु,

विकास की गति को मन्द कर दिया है।

आजकल यही तो राजनीति है,

जनता की,

यही तो नियति है।

7 टिप्‍पणियां:

  1. janta bechari aur kya kar sakti hai
    vayadon aur aashvason ke bharose
    jiti hai aur dhokha khati hai.
    apni apni niyati hai neta aur janata ki
    ek ki kismat dhokha dena aur dooje ki
    dhokha pana

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय शास्त्री जी!
    आपने आजकल के
    चुनावी मौसम के
    अनुकूल अच्छा व्यंग्य कसा है।
    आप बधाई के पात्र हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मयंक जी।
    आजकल
    व्यग्य ही व्यंग्य लिख रहे हैं।
    अच्छा है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. sir,
    Aapne is mahaul men sunder rachnaa blog par lagaayee hai.

    CONGRATULATION.

    उत्तर देंहटाएं
  5. शास्त्री जी!
    बेहतरीन व्यंग है।
    आज नेता ही विकास में बाधक हैं।
    ये सिर्फ अपना ही विकास करते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मयंक जी!
    चुनाव के मौसम में,
    आपका व्यंग सटीक है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails