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शुक्रवार, 6 मार्च 2009

हमको पेड़ लगाने होंगे। (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


मूक प्राणियों की चीखों ने, फिर से हमें पुकारा है,
वन-जीवों को जिन्दा रखना, पावन धर्म हमारा है।
धरा-धाम पर जीव-जन्तुओं, की रक्षा करनी होगी,
धरती का श्रंगार हमें, निज प्राणों से भी प्यारा है।
समझदार हैं , सीधे भी हैं, काम हमारे यह आते हैं,
सरकस के कोड़े खाकर, नूतन करतब दिखलाते हैं।
वन्य जीव जितने भी हैं, सबके अस्तित्व बचाने हैं,
मासूमों की देख की दुर्दशा, सीने फटते जाते हैं।।

इनको अगर बचाना है तो, जंगल हमें बचाने होंगे,
नये वृक्ष ज्यादा से ज्यादा, धरती पर उपजाने होंगे।
फूल-पत्तियाँ ही जीवन हैं, वायु - शोधन करती हैं,
घर के - उपवन में, हमको कुछ पेड़ लगाने होंगे।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया प्रेरक रचना हमें पेड़ लगाना होंगे.

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  2. वन और वन्य जीवों को बचाने के
    सबको प्रयास करने चाहिए।

    जवाब देंहटाएं
  3. जंगल और जानवरों की रक्षा
    करने का सन्देश देती हुई
    कविता प्रेरक और सुन्दर है।

    जवाब देंहटाएं
  4. पर्यावरण पर यह कविता
    बहुत अच्छी लगी।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. जागरूता लिए इस
    सुन्दर कविता के लिए
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. जंगल और इसमें रहने वाले
    दुर्लभ जानवरों की रक्षा के लिए
    हम सबको कमर कसनी होगी।
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  7. वक्त की यही माँग है।
    सुन्दर कविता के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  8. समझदार हैं , सीधे भी हैं, काम हमारे यह आते हैं,सरकस के कोड़े खाकर, नूतन करतब दिखलाते हैं।वन्य जीव जितने भी हैं, सबके अस्तित्व बचाने हैं,मासूमों की देख की दुर्दशा, सीने फटते जाते हैं।।

    सुन्दर कविता।

    जवाब देंहटाएं
  9. वक्‍त की सचमुच यही मांग है ... हमको पेड लगाने ही होंगे।

    जवाब देंहटाएं
  10. bahut sahihame ped lagane honge,is dhara ko bachane ke ie,sare sajiv praniyo ke liye badhai sundar sandes.

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत प्रेरक रचना लिखी है आपने ...अच्छी लगी

    जवाब देंहटाएं
  12. aaj isi jagrukta ki jaroorat hai aur aapka yeh prayas is disha mein sarahniya aur preriat karne wala hai .

    जवाब देंहटाएं
  13. aap ki rachna achchee lagi..yahi ped paudhey hamri dharti ka sringaar hain..inhen bachaye rakhanaa ham sabhi ki jimmedari hai.

    जवाब देंहटाएं

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