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गुरुवार, 16 अक्तूबर 2014

"जब खारे आँसू आ जाते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आँखों की कोटर में, जब खारे आँसू आते हैं।
अन्तस में उपजी पीड़ा की, पूरी कथा सुनाते हैं।।

धीर-वीर-गम्भीर, इन्हें चतुराई से पी लेते हैं,
राज़ दबाकर सीने में, अपने लब को सी लेते हैं,
पीड़ा को उपहार समझ, चुपचाप पीर सह जाते हैं।
अन्तस में उपजी पीड़ा की, पूरी कथा सुनाते हैं।।

चंचल मन है, भोलातन है, नयन बहुत मतवाले हैं,
देख रहे दुनियादारी को, इनके खेल निराले हैं,
उनसे नेह हमेशा होता, जो आँखों को भाते हैं।
अन्तस में उपजी पीड़ा की, पूरी कथा सुनाते हैं।।

मन के नभ पर, जब बादल की सूरत गहराती है,
आँखों के दर्पण में, उसकी मूरत आ जाती है,
जैसी होती मन की हालत, वैसा “रूप” दिखाते हैं।
अन्तस में उपजी पीड़ा की, पूरी कथा सुनाते हैं।। 

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (17.10.2014) को "नारी-शक्ति" (चर्चा अंक-1769)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. कल 17/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  3. अश्रुओं की अनोखी गाथा...

    उत्तर देंहटाएं

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