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गुरुवार, 30 अक्तूबर 2014

"सारे संसार में, सब से न्यारा वतन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हमको प्राणों ,से प्यारा, हमारा वतन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

गंगा-जमुना निरन्तर, यहाँ बह रही,
वादियों की हवाएँ, कथा कह रही,
राम और श्याम का है, दुलारा वतन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

बुद्ध-गांधी अहिंसा के आधर थे,
सत्य नौका के मजबूत पतवार थे,
जान वीरों ने देकर, सँवारा वतन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

शैल-शिखरों पे, संजीवनी की छटा,
सर्दी-गर्मी कभी है, कभी घन-घटा,
कितनी सुन्दर धरा, कितना प्यारा गगन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

पेड़-पौधों का, निखरा हुआ रूप है,
घास है मखमली, गुनगुनी धूप है,
साधु-सन्तों ने तपकर, निखारा वतन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

सबको पूजा-इबादत का, अधिकार है,
सर्व धर्मों का सम्भाव-सत्कार है,
दीन-दुखियों को देता, सहारा वतन!
सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (31.10.2014) को "धैर्य और सहनशीलता" (चर्चा अंक-1783)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपने वतन की जितनी भी तारीफ करें कम है ,बहुत ही बढ़िया सारे संसार में, सब से न्यारा वतन!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच में हमें अपने वतन पर गर्व है
    सुन्दर कविता
    सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  4. Sunder shabd prawaah....apne watan ki jitani tareef karo utni kam... Jai Hind !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार- 31/10/2014 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 42
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

    उत्तर देंहटाएं

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