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शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

"भारत-माता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मैं हिमगिरि हूँ सच्चा प्रहरी,
रक्षा करने वाला हूँ।
शीश-मुकुट हिमवान अचल हूँ,
सीमा का रखवाला हूँ।।
मैं अभेद्य दुर्ग का,
 उन्नत बलशाली परकोटा हूँ।
मैं हूँ वज्र समान हिमालय,
कोई न छोटा-मोटा हूँ।।
माँ की आन-बान की खातिर,
सजग हमेशा खड़ा हुआ हूँ,
दुश्मन को ललकार रहा हूँ,
मुस्तैदी से अड़ा हुआ हूँ,

प्राणों से प्यारी माता के लिए,
वीर बलिदान हो गये।
संगीनों पर माथा रखके,
सरहद पर कुर्बान हो गये।।

मैं सागर हूँ देव-भूमि को,
दिन और रात सवाँर रहा हूँ।
मैं गंगा के पावन जल से,
माँ के चरण पखार रहा हूँ।।
(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)

19 टिप्‍पणियां:

  1. देव-भूमि को नेह-सिन्धु से,
    दिन और रात गुहार रहा हूँ।
    मैं गंगा के पावन जल से,
    माँ के चरण पखार रहा हूँ।।
    Adhbhut rachna ....
    Mai Bhi Ganga Teere Ka Hoon Is Liye Is RACHNA ka marm jaan sakta Hoon .......

    उत्तर देंहटाएं
  2. मैं गंगा के पावन जल से,

    माँ के चरण पखार रहा हूँ।।

    कितना निर्मल है रचना का भाव

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक और सुन्दर कविता शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मैं गंगा के पावन जल से,
    माँ के चरण पखार रहा हूँ।।

    बेहद स्‍नेहिल भाव भारत माता और मां गंगा के प्रति अनुपम प्रस्‍तुति के लिये, आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. मैं अभेद्य दुर्ग का,
    उन्नत बलशाली परकोटा हूँ।
    मैं हूँ वज्र समान हिमालय,
    कोई न छोटा-मोटा हूँ।।

    waah waah.............aaj to bahut hi sundar aur deshhakti mein doobi kavita likhi hai .........badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी चित्रों के साथ गीत के प्रस्तुती लाजवाब बन पडी है , बहुत सुन्दर लगा

    उत्तर देंहटाएं
  7. मैं अभेद्य दुर्ग का,
    उन्नत बलशाली परकोटा हूँ।
    मैं हूँ वज्र समान हिमालय,
    कोई न छोटा-मोटा हूँ।.....सुन्दर. भाव... आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  8. aaj kal apki har rachna ojpoorn evam manbhavan rach rahi hai. behad khushi ki baat hai .dil se badhai!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. जितनी ख़ूबसूरत तस्वीरें उतनी ही सुंदर रचना लिखा है आपने ! बहुत बढ़िया लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  10. शास्त्रीजी,
    मेरे नवासे को आशीर्वाद देते हुए अपने जो छंद लिखा था--'यह दिया है ज्ञान का जलता रहेगा...', वह मुझे बहुत अच्छा लगा. ऋतज को आशीष देने केलिए आपका आभारी हूँ !
    हिम-रक्षक और भारतमाता की अपूर्व वंदना लिखी है आपने ! बधाई !!
    सादर-- आ.

    उत्तर देंहटाएं
  11. Aapki sabhi rachnayen bachpan ko samahit ki hui prateet hoti hain...aisa lagta hai koi apne sare anubhavo ko baccho ko unki hi totli jubaan mein baant raha hai.... kripya is ganga dhara ko yun hi aviral bahne den....
    Anek shubhkamnaye

    उत्तर देंहटाएं
  12. " bahut hi adbhut ..behatrin ..sidhe alfaz ,agar gaherai bhari baat "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  13. " bahut hi adbhut ..behatrin ..sidhe alfaz ,agar gaherai bhari baat "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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