"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

"एक मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



ये आँखे कुछ बोल रही हैं?




आँखें कभी छला करती हैं,

आँखे कभी खला करती हैं।

गैरों को अपना कर लेती-

जब भी चश्म मिला करती हैं।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

19 टिप्‍पणियां:

  1. गैरों को अपना कर लेती-
    जब भी चश्म मिला करती हैं।।
    सच है आँखों बिना बोले बहुत कुछ कर देती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर चित्र सुन्दर मुक्तक।बहुत बढिया!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह क्या बात है शास्त्री जी.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. गैरों को अपना कर लेती, बहुत ही सुन्‍दर पंक्तियां इन शब्‍दों ने दिल को छू लिया, बहुत-बहुत आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. बिना बोले आँखों से कहने वाली कविता और तस्वीर भी ...!

    उत्तर देंहटाएं
  6. छोटी सी प्यारी सी सुंदर रचना और साथ में ख़ूबसूरत तस्वीर ! बहुत खूब !

    उत्तर देंहटाएं
  7. गैरों को अपना कर लेती-

    जब भी चश्म मिला करती हैं। ।वाह वाह सुन्दर बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  8. waah shastri ji.........itni sundar aankhon ke sath itna sundar muktak........dil ko chhoo gaya.

    sach ye aankhein to bahut kuch bol rahi hain bas unhein padhne wali nigaah chahiye.

    उत्तर देंहटाएं
  9. आँखो ने आँखों से कुछ कहा
    आँखों ही आँखों में मना कर दिया
    आँखो ने मुनहार की
    आँखों ने स्वीकार कर लिया
    क्या आँखे है.

    उत्तर देंहटाएं
  10. ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    जय ब्लोगिग-विजय ब्लोगिग
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
    शास्त्रीजी!
    मनमोहक चित्र!
    गैरों को अपना कर लेती- सत्यवचन !!!
    ऑखे ही सब कुछ कर लेने मे सक्षम है।
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

    मगलभावनाओ सहीत
    हे! प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर
    SELECTION & COLLECTION

    उत्तर देंहटाएं
  11. ये आँखें वाकई कुछ कह रही हैं sir! सुंदर चित्र और मुक्तक

    उत्तर देंहटाएं
  12. ये आँखें कुछ बोल रही हैं!
    लगता है - कुछ तोल रही हैं!
    छुपे हुए जो मन के भीतर,
    भेद अनूठे खोल रही है!

    उत्तर देंहटाएं
  13. गैरों को अपना कर लेती-
    जब भी चश्म मिला करती हैं।।

    वाह!! शास्त्री जी सुन्दर पंक्तियाँ ...

    साधू!!

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails