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सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

"मजबूर हो गये हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



रहते थे पास में जो, वो दूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।


श्रृंगार-ठाठ सारे, करने लगे किनारे,
महलों में रहने वाले, मजदूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।


थे जो कभी सरल से, अब बन गये गरल से,
जो थे कभी सलोने, बे-नूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।


रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,
पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।


सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं।
मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. मगरूर थे कभी जो मजबूर हो गये, बहुत ही भावमय प्रस्‍तुति आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
    अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।
    bauht hi bhaavpoorn prastuti ke saath ek sunder kavita.......

    उत्तर देंहटाएं
  3. रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,

    पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।

    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    बहुत सुन्दर,
    मगरूर थे कभी जो उन्हें मजबूर कर दिया है
    घूमते वक्त के पहिये ने सब चूर-चूर कर दिया है
    लेकिन इंसान तब भी सुधरता !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. "रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,

    पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं।

    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।। "

    " bahut hi badhiya ...bhavpurn ."

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. महलों में रहने वाले, मजदूर हो गये हैं।

    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    sundar peshkash

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर शव्दो से सजाया आप ने इस ्रचना को, बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  7. महलों में रहने वाले, मजदूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।
    यही लाइन सटीक है शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  9. सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
    अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं।
    मगरूर थे कभी जो, मजबूर हो गये हैं।।

    प्राभावशाली अभिव्यक्ति .....

    उत्तर देंहटाएं
  10. waqt har kisi ka guroor tod deta hai............bahut hi umda rachna

    उत्तर देंहटाएं
  11. सपने हुए सयाने, सच को लगे चिढ़ाने,
    अब देखकर हकीकत, काफूर हो गये हैं ........

    सपने तो सपने होते हैं......... सयाने हो जाएँ तो पूरे हने को मचलते हैं ......
    भावनात्मक रचना है .......

    उत्तर देंहटाएं
  12. रहते गुमान में थे. बैठे जो शान से थे,

    पर्वत से टूटकर कर वो,सब चूर हो गये हैं। बहुत सुंदर.....

    उत्तर देंहटाएं
  13. व़र्तमान और भविष्‍य एक सा नहीं रहता। कल तक जो मजबूत थे आज मजबूर हो गए हैं। यही विधान है। बढिया अभिव्‍यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं

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