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बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

"प्रीत की होती सजा कुछ और है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")






अन्धे कुएँ में पैंठकर, ऐसे न तुम ऐंठा करो,
झील-तालाबों की दुनिया और है।


बन्द कमरों में न तुम, हर-वक्त यूँ बैठा करो,
बाग की ताजा फिजाँ कुछ और है।


स्वर्ण-पिंजड़े में कभी शुक को सुकूँ मिलता नही,
सैर करने का मज़ा कुछ और है।


जुल्म से और जोर से अपना नहीं बनता कोई
प्यार करने की रज़ा कुछ और है।


गाँव में रहकर रिवाजों-रस्म को मत तोड़ना,
प्रीत की होती सज़ा कुछ और है।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रचना ।
    अन्धे कुएँ में पैंठकर, ऐसे न तुम ऐंठा करो,
    झील-तालाबों की दुनिया और है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही शानदार, ज़बरदस्त और लाजवाब रचना लिखा है आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  3. जुल्म से और जोर से अपना नहीं बनता कोई
    प्यार करने की रज़ा कुछ और है।
    बहुत सही ...भावपूर्ण रचना ..!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी,

    एक और सधी हुई अभिव्यक्ति...काश हमारे नेतागण और राष्ट्र के दिशा निर्देशक गण इस शेर को समझ पाते

    बन्द कमरों में न तुम, हर-वक्त यूँ बैठा करो,
    बाग की ताजा फिजाँ कुछ और है।

    सुन्दर!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. अन्धे कुएँ में पैंठकर, ऐसे न तुम ऐंठा करो,

    झील-तालाबों की दुनिया और है।

    बन्द कमरों में न तुम, हर-वक्त यूँ बैठा करो,

    बाग की ताजा फिजाँ कुछ और है।

    वाह ! शास्त्री जी आज तो आप कुछ रंगीन मिजाज नजर आ रहे है !

    उत्तर देंहटाएं
  6. जय हो आपकी.........

    आपकी रचना का आनन्द ही कुछ और है

    उत्तर देंहटाएं
  7. kahte to aur bhi hai bahut kuch
    magar aapka andaz-e-bayan kuch aur hai

    bahut hi sundar aur umda likha hai ...........badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  8. अन्धे कुएँ में पैंठकर, ऐसे न तुम ऐंठा करो...

    जज्बातों की गहरी उडान है .......... सुन्दर रचना है शास्त्री जी .........

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह वाह शास्त्री जी जबाब नही आप की इन पंकित्यो का, बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह वाह बहुत खूब..क्या बात कही है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. सच में कूपमण्डूक क्या जाने समन्दर का विस्तार!

    उत्तर देंहटाएं
  12. स्वर्ण-पिंजड़े में कभी शुक को सुकूँ मिलता नही,
    सैर करने का मज़ा कुछ और है। लाजवाब रचना

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुन्दर रचना और चित्र लेकिन डॉक्टर साहब आप्का ब्लॉग बहुत देर मे खुलता है ..शायद टेम्प्लेट की वज़ह से ।

    उत्तर देंहटाएं

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