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शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

"दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों !
नौ माह और दस दिन में पूरी हो गयीं हैं,
आज 400 पोस्ट !


जीवन के कवि सम्मेलन में, गाना तो मजबूरी है।
आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।


जाने कितने स्वप्न संजोए,
जाने कितने रंग भरे।
ख्वाब अधूरे, हुए न पूरे,
ठाठ-बाट रह गये धरे।
सरदी-गरमी, धूप-छाँव को, पाना तो मजबूरी है।
आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।

जितना आगे कदम बढ़ाया,
मंजिल उतनी दूर हो गयीं।
समरसता की कल्पनाएँ सब,
थककर चकनाचूर हो गयीं।
घिसी-पिटी सी रीत निभाना, जन-जन की मजबूरी है।
आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।


बचपन बीता, गयी जवानी,
सूरज ढलने वाला है।
चिर यौवन को लिए हुए, 
मन सबका ही मतवाला है।
दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है।
आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. shastri ji,

    sabse pahle to 400 vi post ke liye hardik badhayi sweekarein.dua karte hain ki aap aise hi likhte rahein aur hum aapko 4000vi post bhi aise hi padhein.

    bahut hi sundar shabdon se saji rachna likhi hai..........zindagi ki sachchaiyon ka bodh karati huyi rachna ke liye badhayi.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बधाई, और पांच सौवी पोस्ट का बेसब्री से इन्तजार !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बहुत बधाई शस्त्री जी, आप की रचना बहुत सुंदर लगी धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच है, सृजन सुप्त रहता है, पर जब फूटता है तो विस्फोट होता है! सब बहुत तेज होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. 400 पोस्ट के लिये बधाई

    दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है।
    आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।
    बहुत सघन भाव की रचना आपने चार शतकीय पोस्ट में पोस्ट किया है

    उत्तर देंहटाएं
  7. "बचपन बीता, गयी जवानी,
    सूरज ढलने वाला है।
    चिर यौवन को लिए हुए,
    मन सबका ही मतवाला है।
    दरवाजों की दस्तक को,
    पढ़ पाना बहुत जरूरी है।
    आये हैं तो कुछ कह-सुनकर,
    जाना बहुत जरूरी है।।"

    जीवन के विविध पहलुओं पर लिखी गई,
    सुन्दर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है।
    आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।
    nice.............nice.................nice.............

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ख़ूबसूरत रचना ! ४०० वी पोस्ट के लिए ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनायें! आप ऐसे ही सुंदर रचनाएँ लिखते रहिये और जल्द ही ५०० पोस्ट पूरा हो उसीकी प्रतीक्षा रहेगी !

    उत्तर देंहटाएं
  10. मेरी बधाई -
    401वीं पोस्ट के लिए,
    जो बहुत जल्दी आप तक पहुँचनेवाली है!

    उत्तर देंहटाएं
  11. कविता है एक भाव की नदी बहना बहुत ज़रूरी है,
    सुंदर अभिव्यक्ति भावों की कहना बहुत ज़रूरी है,

    बहुत बढ़िया कविता ..बहुत बहुत बधाई!!

    उत्तर देंहटाएं
  12. मयंक जी
    ४०० वीं पोस्ट के लिए बधाई,
    १ वर्ष से कम समय में ४०० पोस्ट लिखने के लिए फिर से बधाई.
    और अंत में ---
    जिस रचना में ...
    """जितना आगे कदम बढ़ाया,
    मंजिल उतनी दूर हो गयीं।""
    ऐसे वाक्यों का प्रयोग हो , हिंदी कविता संसार गर्वित होगा ही, इस लिए आप इस रचना के लिए भी बधाई के पात्र हैं.
    - विजय

    उत्तर देंहटाएं
  13. चार शतक पूर्ण करने पर बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  15. दरवाजों की दस्तक को, पढ़ पाना बहुत जरूरी है।
    आये हैं तो कुछ कह-सुनकर, जाना बहुत जरूरी है।।

    बेहद खूबसूरत भाव उत्तम रचना
    ४०० पोस्ट पूरा होने की हार्दिक बधाई
    - आकांक्षा
    प्रकाम्या ( Prakamya )

    उत्तर देंहटाएं
  16. बधाई हो शास्त्री जी।

    अब हजार तक जाने में बस छः सौ की ही दूरी है।
    जल्द करेंगे शास्त्री जी यह लिखना जो मजबूरी है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  17. 400 पोस्ट पूरे करने की बधाई  !!!

    उत्तर देंहटाएं
  18. chaar sauveen post ke liye aapko bahut bahut badhai........ aapki yeh rachna bahut sunder lagi.......

    उत्तर देंहटाएं
  19. बधाईयाँ 400 पोस्ट और भावपूर्ण कविता के लिए.....

    उत्तर देंहटाएं
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    शुभेच्छू
    चच्चा टिप्पू सिंह

    उत्तर देंहटाएं
  21. मंयंक जी बहुत बहुत बधाई ये वास्तव मे चमत्कार है भगवान आपको इसी तरह आगे रखे। गीत भी बहुत सुन्दर है बधाइ और धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  22. 400वीं पोस्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई!

    उत्तर देंहटाएं

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