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शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

"इन्दिरा! भूलेंगे कैसे तेरो नाम!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

राष्ट्र-नायिका श्रीमती इन्दिरा गांधी को 
!! शत्-शत् नमन !!




मैंने 31 अक्टूबर, 1984 को लिखी थी यह कविता।
!! श्रद्धाञ्जलि़ !!
रोयें सारे नगर और गाम।

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
इन्दिरा!

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
तेरी हत्या पर नभ रोया,
रोये चाँद सितारे।
सारे तेरे विरोधी रोये,
रोये अपने सारे।
सब जन करते हैं तेरो गुणगान।

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
इन्दिरा!

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!


तुलसी की मानस रोई और 
जायसी की अखरावट,
श्रीमति शिवा बावनी रोई
रोई है पद्मावत,
रोये नानक की वाणी,
सबह-औ-शाम।

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
इन्दिरा!

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!


सूर कबीर के पद रोये
और रोईं हैं कुण्डलिया.
नरोत्तम के कृष्ण रोये थे,
रोईं बहुत मुरलिया,
रोये रसिक बिहारी के श्याम।
भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
इन्दिरा!

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!


स्वर्ग-लोक के सुर और दानव
करते क्रन्दन-क्रन्दन,
भारत के सब नर और नारी
करते तेरा वन्दन.
करते तुझको हैं शत्-शत् प्रणाम।
भूलेंगे कैसे तेरो नाम!
इन्दिरा!

भूलेंगे कैसे तेरो नाम!

8 टिप्‍पणियां:

  1. श्रीमती गांधी के आपातकाल का समर्थक नहीं रहा पर आपातकाल की घुटन पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने वाले लम्पटों को भी बहुत झेला!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक साहसी महिला थी जिन्होने अपने शाशन काल मे अच्छे बुरे फ़ैसले बडी दृढता से लिये. इसी वजह से उनका समर्थक ना होने के बावजूद उनका प्रसंशक हूं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. indira ji ki samarthak na hote huye bhi unki maut par royi to main bhi thi..........kuch bhi kaho desh ko ek pahchan di thi.

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रियदर्शनी इन्दिरा जी को शत्-शत् नमन!
    स्मरम कराने हेतु आपका आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  5. भारत की पहली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को शत शत नमन !

    उत्तर देंहटाएं

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