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बुधवार, 14 जनवरी 2015

"चौदह दोहे-उत्तरायणी पर्व" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया है उल्लास का, उत्तरायणी पर्व।
झूम रहे आनन्द में, सुर-मानव-गन्धर्व।१।
--
जल में डुबकी लगाकर, पावन करो शरीर।
नदियों में बहता यहाँ, पावन निर्मल नीर।२।
--
जीवन में उल्लास के, बहुत निराले ढंग।
बलखाती आकाश में, उड़ती हुई पतंग।३।
--
तिल के मोदक खाइए, देंगे शक्ति अपार।
मौसम का मिष्ठान ये, हरता कष्ट-विकार।४।
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उत्तरायणी पर्व के, भिन्न-भिन्न हैं नाम।
लेकर आता हर्ष ये, उत्सव ललित-ललाम।५।
--
सूर्य रश्मियाँ आ गयीं, खिली गुनगुनी धूप।
शस्य-श्यामला धरा का, निखरेगा अब रूप।६।
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भुवनभास्कर भी नहीं, लेगा अब अवकाश।
कुहरा सारा छँट गया, चमका भानुप्रकाश।७।
--
अब अच्छे दिन आ गये, हुआ शीत का अन्त।
धीरे-धीरे चमन में, सजने लगा बसन्त।८।
--
रजनी आलोकित हुई, खिला चाँद रमणीक।
देखो अब आने लगे, युवा-युगल नज़दीक।९।
--
पतझड़ का मौसम गया, जीवित हुआ बसन्त।
नवपल्लव पाने लगा, अब तो बूढ़ा सन्त।१०।
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पौधों पर छाने लगा, कलियों का विन्यास।
दस्तक देता द्वार पर, खड़ा हुआ मधुमास।११।
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रवि की फसलों के लिए, मौसम ये अनुकूल।
सरसों पर आने लगे, पीले-पीले फूल।१२।
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भँवरा गुन-गुन कर रहा, तितली करती नृत्य।
खुश होकर करते सभी, अपने-अपने कृत्य।१३।
--
आज सार्थक हो गयी, पूजा और नमाज।
जीवित अब होने चला, जीवन में ऋतुराज।१४।


7 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रवाहमय प्रस्तुति , मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं ,सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सराहनीय पोस्ट
    सक्रांति की शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-01-2015 को चर्चा मंच पर दोगलापन सबसे बुरा है ( चर्चा - 1859 ) में दिया गया है ।
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर दोहे. मकर संक्रांति की शुभकामनाएं.
    नई पोस्ट : फासले कब मिटा करते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर सामयिक प्रस्तुति ..
    मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं

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