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शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

"मुख पर राम नाम आता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गांधी जी को नमन
राम नाम है सुख का धाम। 
राम सँवारे बिगड़े काम।। 

असुर विनाशक, जगत नियन्ता, 
मर्यादापालक अभियन्ता, 
आराधक तुलसी के राम। 
राम सँवारे बिगड़े काम।। 

मात-पिता के थे अनुगामी, 
चौदह वर्ष रहे वनगामी, 
किया भूमितल पर विश्राम। 
राम सँवारे बिगड़े काम।। 

कपटी रावण मार दिया था 
लंका का उद्धार किया था, 
राम नाम में है आराम। 
राम सँवारे बिगड़े काम।। 

जब भी अन्त समय आता है, 
मुख पर राम नाम आता है, 
गांधी जी कहते हे राम!
राम सँवारे बिगड़े काम।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी बधाई सुंदर सार्थक रचना के लिये ....सत्य है.. राम का नाम अंत समय याद आता है ..सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाकई में राम नाम में बहुत आराम है।सार्थक रचना शास्त्री जी।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शहीद दिवस पर अति सुन्दर रचना ,राम संवारे बिगड़े काम

    उत्तर देंहटाएं

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