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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

"मुक्त छन्द-नये वर्ष में आप हर्षित रहें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)


गये साल को है प्रणाम
है नये साल का अभिनन्दन,
पूजा-अजान के साथ-साथ
होवे भारतमाँ का वन्दन।
जीवित जंगल और बाग रहें
सुर सज्जित राग-विराग रहें,
सच्चे अर्थों में तब ही तो
होगा नूतन का अभिनन्दन।।
--
चमकेगा फिर से गगन-भाल
आने है फिर से नया साल,
हिन्दू-मुस्लिम, कट्टरपन्थी
अब नहीं बुनेंगे धर्म-जाल।
होंगी सब दूर विफलताएँ
आयेंगी नई सफलताएँ,
खुशियाँ पसरेंगी आँगन में
सुधरेंगें बिगड़े हुए हाल।।
--
गुज़र गया है साल पुराना
गाओ फिर से नया तराना,
सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला
वही ठौर है, वही ठिकाना।
लोग मील के पत्थर जैसे
अपनी मंजिल पायें कैसे?
औरों को पथ बतलाते हैं
नहीं जानते कदम बढ़ाना।।
--
इस नये वर्ष में आप हर्षित रहें,
ख्याति-यश में सदा आप चर्चित रहें।
आज उपवन में महकें सुगन्धित सुमन,
राष्ट्र के यज्ञ में आप अर्पित रहें।।

3 टिप्‍पणियां:

  1. नव वर्ष की शुभकामनाऐं । सुंदर रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला,
    वही ठौर है, वही ठिकाना।
    लोग मील के पत्थर जैसे,
    अपनी मंजिल पायें कैसे?
    औरों को पथ बतलाते हैं,
    नहीं जानते कदम बढ़ाना।। bahut sundar panktiya ....khud kadam nahi badhate pr auron ko hai rah dikhate ......

    उत्तर देंहटाएं

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