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शनिवार, 24 जनवरी 2015

"आरती उतार लो आ गया बसन्त है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


आरती उतार लो,
आ गया बसन्त है!
ज़िन्दग़ी सँवार लो
आ गया बसन्त है!

खेत लहलहा उठे,
खिल उठी वसुन्धरा,
चित्रकार ने नया,
आज रंग है भरा,
पीत वस्त्र धार लो,
आ गया बसन्त है!
ज़िन्दग़ी सँवार लो
आ गया बसन्त है!

शारदे के द्वार से,
ज्ञान का प्रसाद लो,
दूर हों विकार सब,
शब्द का प्रसाद लो,
धूप-दीप साथ ले
आरती उतार लो!
आ गया बसन्त है!
ज़िन्दग़ी सँवार लो
आ गया बसन्त है!

माँ सरस्वती से आज,
बिम्ब नये माँग लो,
वन्दना के साथ में,
भाव नये माँग लो,
मातु से प्रवाह की
अमल-धवल धार लो।
आ गया बसन्त है!
ज़िन्दग़ी सँवार लो
आ गया बसन्त है!
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6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रचना.
    वसंत पंचमी की शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. कई बार पढ़ी ,सरल,सुंदर,लय-तालयुक्त ,प्रवाह-पूर्ण ,।वसंत पंचमी की शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर आराधना...वसंत पंचमी की शुभकामनाएँ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर प्रस्तुति-आरती उतार लो, आ गया बसन्त है!
    ज़िन्दग़ी सँवार लो, आ गया बसन्त है!

    खेत लहलहा उठे,खिल उठी वसुन्धरा,
    चित्रकार ने नया, आज रंग है भरा,
    पीत वस्त्र धार लो, आ गया बसन्त है!
    ज़िन्दग़ी सँवार लो, आ गया बसन्त है!

    माँ सरस्वती से आज,बिम्ब नये माँगलो,
    वन्दना के साथ में, भाव नये माँग लो,
    शारदे के द्वार से, ज्ञान का प्रसाद लो,
    दूर हों विकार सब,शब्द का प्रसाद लो,

    उत्तर देंहटाएं

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