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रविवार, 1 मार्च 2015

"दोहे... मोदी का अवतार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

खेतीहर पर हो रहा, अब तो अत्याचार।
जनता पर भारी पड़ा, मोदी का अवतार।१।
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गाँधी टोपी देखकर, सहम गयी सरकार।
अन्ना जी अब करेंगे, शासक का उपचार।२।
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मँहगाई का हो गया, शासन में अब मेल।
झूठे सपने दिखाकर, बना लिया है खेल।३।
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आज आदमी मल रहा, अपने खाली अपने हाथ।
आगामी मतदान में, नहीं मिलेगा साथ।४।
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मँहगाई के बजट ने, खोली सारी पोल।
अच्छे दिन का स्वप्न तो, आज हो गया गोल।५।
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आम जरूरत की हुईं, मँहगी सारी चीज।
देख सुशासन को यहाँ, लोग रहे हैं खीझ।६।
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अपना भारतवर्ष हैगाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा का यहाँबना रहे परिवेश।७।

4 टिप्‍पणियां:

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