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मंगलवार, 31 मार्च 2015

"मूर्ख दिवस पर बुद्धिमानों को समर्पित कविता) (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“मूर्खदिवस पर..चोर पुराण”
कुछ ने पूरी पंक्ति उड़ाई,
कुछ ने थीम चुराई मेरी।
मैं तो रोज नया लिखता हूँ
रोज बजाता हूँ रणभेरी।

चोरों के नहीं महल बनेंगे,
इधर-उधर ही वो डोलेंगे।
उनको माँ कैसे वर देगी,
उनके शब्द नहीं बोलेंगे।

उनका जीना भी क्या जीना,
सिसक-सिसककर जो है जिन्दा।
ऐसे पामर नीच-निशाचर,
होते नहीं कभी शरमिन्दा।

अक्षय-गागर मुझको देकर,
माता ने उपकार किया है।
चोर-उचक्कों से देवी ने,
शब्दकोश को छीन लिया है।

मैं उनका स्वागत करता हूँ,
जो ऐसे गीतों को रचते।
मुखड़ा मेरा जिनको भाया,
किन्तु सत्य कहने से बचते।

छन्द-काव्य को तरस रहे वो,
चूर हुए उनके सपने हैं।
कैसे कह दूँ उनको बैरी,
वो सब तो मेरे अपने हैं।

समझदार के लिए इशारा,
इस तुकबन्दी में करता हूँ।
मैं दिन-प्रतिदिन लिखता जाता,
केवल ईश्वर से डरता हूँ।

12 टिप्‍पणियां:

  1. लेखन में मौलिकता बहुत जरूरी है।बहुत सुन्दर रचना शास्त्री जी।बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. लेखन में मौलिकता बहुत जरूरी है।बहुत सुन्दर रचना शास्त्री जी।बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही खूबसूरत रचना सर जी।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. चोरी तो चोरी है, सुंदर शास्त्रीजी सादर प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  5. चोरों के नहीं महल बनेंगे,
    इधर-उधर ही वो डोलेंगे।
    उनको माँ कैसे वर देगी,
    उनके शब्द नहीं बोलेंगे।
    ...बिलकुल सच कहा है...बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  6. कुछ ने पूरी पंक्ति उड़ाई,
    कुछ ने थीम चुराई मेरी।
    मैं तो रोज नया लिखता हूँ
    रोज बजाता हूँ रणभेरी।......

    बहुत बढ़िया रचना आदरणीय शास्त्री सर

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह वाह शास्त्री जी बेहतरीन जवाब है चोरों को :)

    उत्तर देंहटाएं
  8. एक गंभीर और आम समस्या को आपने बहुत सहज तरीके से प्रस्तुत किया है, आभार आपका।
    पंक्तियाँ या थीम की चोरी तो छोटी चोरी है, लोग दूसरों की पूरी रचना उड़ा कर अपने नाम से छाप लेते हैं। ऐसे कई मामले आए दिन देखने को मिलते हैं। ऐसा मेरे साथ भी हुआ है। अपनी रचनाएँ दूसरों के नाम से या बिना नाम या साभार के, देख कर हैरानी होती है। फेसबुक और ब्लॉग पर दूसरों की रचना अपने नाम से डालने का चलन बढ़ गया है। इससे कैसे निपटा जाये? ऐसी चोरी से ब्लॉग को कैसे बचाया जाए? यह भी सुझाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहद सार्थक रचना और व्यंग । इंटरनेट के आने से ये प्रथा आम सी हो गयी है ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेहद सार्थक रचना और व्यंग । इंटरनेट के आने से ये प्रथा आम सी हो गयी है ।

    उत्तर देंहटाएं

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