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शनिवार, 7 मार्च 2015

“नभ में लाल-गुलाल उड़े हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

Holi-group
रंग बिरंगे चेहरे लेकर,
घूम रही है टोली!
गली मुहल्लों चौबारों में,
झूम रही है होली!!

मौसम ने चोला बदला है,
सूरज ने ली अँगड़ाई,
फागुन की फागुनिया बहती,
तन-मन में मस्ती छाई,
सजी हुई है बाजारों में,
सतरंगी रंगोली!
गली मुहल्लों चौबारों में,
झूम रही है होली!!

झाड़ी में से बुलबुल चहकी,
सेंमल-टेसू दहक रहे  हैं,
नई-नवेली कलियाँ महकी,
लोभी भँवरे बहक रहे हैं,
होती है देवर-भाभी में
जमकर हँसी ठिठोली!
गली मुहल्लों चौबारों में,
झूम रही है होली!!

ठण्डाई और भंग घुट रही,
पिचकारी पागल हैं,
बरसाते रस उमड़-घुमड़कर,
रंगों के बादल हैं,
धोती-कुरते के संग-संग में
भीग रही हैं चोली!
गली मुहल्लों चौबारों में,
झूम रही है होली!!

नभ में लाल-गुलाल उड़े हैं,
बजते ढोल-नगाड़े,
अपना बिस्तर बाँध चुके हैं,
ठण्डक वाले जाड़े,
साजन और सजनी में होती,
जमकर आँख-मिचोली!
गली मुहल्लों चौबारों में,
झूम रही है होली!!

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर ।
    होली की हार्दिक शुभकामनाऐं ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. "अपना बिस्तर बाँध चुके हैं,
    ठण्डक वाले जाड़े"

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर होली गीत ...
    रंगोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  5. Bahut badhiya holi ke badlate mausam ka chitran. Good wishes.

    उत्तर देंहटाएं

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