"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

समर्थक

शनिवार, 14 मार्च 2020

गीत "भाईचारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
सिसक रहा है आज वतन में, खुशियों का चौबारा।
छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
--
पगडण्डी पर चोर-लुटेरे, चौराहों पर डाकू,
रिश्तों की झाड़ी में पसरे, भाई बने लड़ाकू,
सम्बन्धों में गरल भरा है, प्यार हुआ आवारा।
छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
--
मन में कोरा स्वार्थ समाया, मुख पर मीठी बातें,
ममता-समता झूठी-झूठी, झूठी सब सौगातें,
अपने ही हो गये बिराने, देगा कौन सहारा?
छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
--
नहीं तमन्ना है दुलार की, नहीं प्यार में राहत,
सन्तानों को केवल है अब, अधिकारों की चाहत,
पर आने पर पंछी ने घर से कर लिया किनारा।
छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
--

4 टिप्‍पणियां:

  1. नहीं तमन्ना है दुलार की, नहीं प्यार में राहत,
    सन्तानों को केवल है अब, अधिकारों की चाहत,
    पर आने पर पंछी ने घर से कर लिया किनारा।
    छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार(१५-०३-२०२०) को शब्द-सृजन-१२ "भाईचारा"(चर्चा अंक -३६४१) पर भी होगी
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का
    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    **
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. सिसक रहा है आज वतन में, खुशियों का चौबारा।
    छल-फरेब की कारा में, जकड़ा है भाईचारा।।
    हृदयस्पर्शी रचना ,सादर नमन सर

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails