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शनिवार, 7 मार्च 2020

गीत "सपनों में उजियाला है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन में अँधियारालेकिन सपनों में उजियाला है।
आभासी दुनिया में होतामन कितना मतवाला है।।
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चहक-महक होती बसन्त सीनहीं दिखाई देती है,
आहट नहीं मगर फिर भीपदचाप सुनाई देती है,
वीरानी बगिया को जोपल-पल अमराई देती है,
शिथिल अंग में यौवन कीआभा अँगड़ाई लेती है,
कभी नहीं मुरझातीसुमनों की ये मंजुल-माला है।
आभासी दुनिया में होता मन कितना मतवाला है।।
--
मौसम चाहे कोई भी तोपलता है मधुमास सदा,
स्वप्न दिखाती स्वर्गलोक केआकर परियाँ यदा-कदा,
आभासी दुनिया की होतीबहुत निराली प्रियंवदा,
यहाँ दिखाई देती सबकोधरा-गगन की अलग अदा,
पाठ पढ़ाती बिना दाम केजालजगत की शाला है।
आभासी दुनिया में होतामन कितना मतवाला है।।
--
जैसी जिसकी रुचियाँ होतींवैसा इसमें माल भरा,
बंजर नहीं कभी होती हैचन्दनवन की वसुन्धरा,
सपनों की आजादी परकैसे सैनिक कैसा पहरा
पठन-मनन का इस बगिया सेहोता है नाता गहरा,
माया नगरी के महलों मेंरहता सदा उजाला है।
आभासी दुनिया में होतामन कितना मतवाला है।।
--
भाँति-भाँति के रंग उभरतेपल-पल जिसके आँचल पर,
दृष्टि हमेशा जिसकी रहतीविश्वपटल की हलचल पर,
जहाँ निरन्तर बहती रहतीगंगा-यमुना भूतल पर,
रत्नों का भण्डार खोज लोजा करके सागर-तल पर,
अमल-धवल ये लोक अनोखालगता भोला-भाला है।
आभासी दुनिया में होतामन कितना मतवाला है।।
--

2 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (8 -3-2020 ) को " अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस " (चर्चाअंक -3634) पर भी होगी

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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