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रविवार, 17 अक्तूबर 2010

“…व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

imagesझूठ पर सत्य की जीत होती सदा,
विजयादशमी के पावन ये सन्देश हैं।
पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।

वेद और शास्त्र रावण को कण्ठस्थ थे,
किन्तु उसने चुनी राह अन्याय की,
शत्रु उसको समझता दशानन सुभट,
जो भी बातें बताता उसे न्याय की,
पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।

पूरे कुनबे में केवल विभीषण बचा,
क्योंकि उसने दिया सत्य का साथ था,
अन्तत: वो ही लंका का राजा बना,
उसके सिर पर सदा राम का हाथ था,
पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।

जो भलाई करेगा वही है भला,
अन्त होता बुराई का है सर्वदा,
नाम होता जगत में उसी का तो है,
जो भी जीवन में सत्कर्म करता सदा,
पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।
झूठ पर सत्य की जीत होती सदा,
विजयादशमी के पावन ये सन्देश हैं।

(चित्र गूगल छवि से साभार)

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर संदेश देती रचना…………विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर भाव लिए रचना |बधाई |
    विजय दशमी पर शुभकामनाएं
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  3. लेकिन आपकी रचना में छुपा एक खूबसूरत संदेश है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी संदेशप्रद रचना। बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोsस्तु ते॥
    विजयादशमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    काव्यशास्त्र

    उत्तर देंहटाएं
  5. बड़े पते की बात कविता से उभारी है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. खूबसूरत संदेश..... विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  7. विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनायें।
    --
    आज आपका सक्रियता क्रमांक 10 है!
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  8. पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
    ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं..

    बहुत बढ़िया सन्देश ...
    आभार ..!

    उत्तर देंहटाएं
  9. "पाप-आचार मन में अगर हों भरे,
    ज्ञान के व्यर्थ सारे ही उपदेश हैं।"
    बहुत सुन्दर सन्देश देती कविता.. अभी कहा लिखी जा रही ऐसी गेय कवितायें .. दिन्कर, निराला प्रसाद की कविताओं सी लग रही..

    उत्तर देंहटाएं

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