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मंगलवार, 5 अक्तूबर 2010

“प्यारा भइया रूठ गया-देवदत्त प्रसून” (प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

सहा न उससे झूठ गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।
श्री देवदत्त “प्रसून”
(श्री देवदत्त “प्रसून” जी साहित्य के धनी रहे हैं। 
आज प्रस्तुत है- हाकली छंद में रची हुई उनकी यह सुन्दर रचना।)
सहा न उससे झूठ गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।

वह कितनी चालाकी से,
माल सभी का लूट गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।

तगड़ी घूस की ताकत थी,
पहुँच के बल पर छूट गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।

कच्चा धागा कोशिश का.
इक झटके से टूट गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।

प्रसून पापों का मटका,
सत्य की चोट से फूट गया।
प्यारा भइया रूठ गया।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. तगड़ी घूस की ताकत थी,
    पहुँच के बल पर छूट गया।
    प्यारा भइया रूठ गया।।
    वाह, बहुत ही सुन्दर शास्त्री जी !आज का सच बयान करती सुन्दर पंक्तियाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  2. तगड़ी घूस की ताकत थी,
    पहुँच के बल पर छूट गया।
    बहुत अच्छी लगी प्रसून जी की रचना। धन्यवाद। कृ्प्या इस ब्लाग को भी देखें धन्यवाद।
    http://veeranchalgatha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रसून जी की रचना बढ़िया है... बढ़िया प्रस्तुति..
    चिट्ठाजगत की बत्ती जली मिली ... चिट्ठाजगत टीम को बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  4. एक बेहद खूबसूरत कविता…………॥बेहद सुन्दर भाव्।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह, आनन्द आ गया पढ़कर। सत्य उधेड़कर रख दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर शास्त्री जी इस तगडी घुस के लिये भईया ने तगडी घुस भी ली हो गी, धन्यवाद इस सत्य के लिये

    उत्तर देंहटाएं
  7. .

    पहुँच के बल पर छूट गया।
    प्यारा भइया रूठ गया।।

    बहुत अच्छी लगी रचना।

    .

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर रचना.. सहजता से कही गई गंभीर बातें.. इमानदार लोगो के साथ ऐसा ही होता है..
    सहा न उससे झूठ गया।
    प्यारा भइया रूठ गया।।

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्रसून भइया की रचना तो बहुत सुन्दर लगाई है!
    --
    सक्रियता क्रमांक 9 पर आने के लिए आपको बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  10. तगड़ी घूस की ताकत थी,
    पहुँच के बल पर छूट गया।
    प्यारा भइया रूठ गया।। ...

    हर पंक्ति सच की बयानी कर रही है .... नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं

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